अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तो समस्या है। सड़क वाला कुत्ता काटले तो आप जानते है नही, उसको इंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डॉक्टर के पास जायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुत दर्द होता है और खर्च भी हो जाता है कम से कम 50000 तक कई बार, गरीब आदमी के पास वो भी नही है ।
कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए बिलकुल ठीक होगा वो आदमी बस उसको एक दावा दे दीजिये । दावा का नाम है Hydrophobinum 200 (ये आपको होमोपेथिक स्टोर से मिलेगी) और इसको 10-10 मिनट पर जिव में तिन ड्रोप डालना है । कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दावा दे दीजिये और भूल जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दावा को सूरज की धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रेबिस सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रेबिस नही होता।
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आवारा कुत्तों अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दावा दे सकते है लेकिन उससे कुछ नही होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हम परेशान रहते है, और कुछ डर डॉक्टरों ने बिठा रखा है कि इंजेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। अपने शरीर में थोड़े बहुत resistance सबके पास है अगर कुत्ते के काटने से उनके लारग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये है तो उनको ख़तम करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो ख़तम कर ही लेता है । लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको confirm नही होता जबतक 20000-50000 खर्च नही कर लेते ये उस समय लिए राजीव भाई ने ये दावा लेने की बात कही है। और इसका एक एक ड्रोप 10-10 मिनट में जिव पे तिन बार डाल के छोड़ दीजिये । 30 मिनट में ये दावा सब काम कर देगा । यह लेख आप राजीव दीक्षित जी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है
कई बार कुत्ता घर के बच्चों से साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जखम में थोडा हल्दी लगा दीजिये पर साबुन से उस जखम को बिलकुल मत धोये नही तो वो पक जायेगा, हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antitetanatic, Anti-inflammatory है।
मनुष्य के शरीर में आंखें वह अंग हैं जिसका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। आंखें वह इन्द्रियां होती हैं जिसके कारण ही हम वस्तुओं को देख सकते हैं। हमारे शरीर की समस्त ज्ञानेन्द्रियों में आंखें सबसे प्रमुख ज्ञानेन्द्रियां हैं। आंखों के बिना किसी कार्य को करने में हम असमर्थ हो जाते हैं। आंख की तरह ही कान भी शरीर का बहुत महत्वपूर्ण अंग है
आंख ओर कान की समस्याओ का इलाज >>>
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मार्केट में वैसे तो न जाने कितने ही टूथपेस्ट आ गए हैं। समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कौन-सा यूज़ करें। सफेद दांतों के लिए ये वाला, हेल्दी दांतों के लिए वो वाला.. मने फुल कन्फ्यूज़न। अब बेचारे लोग करें तो क्या करें! नीम वाला यूज़ करें कि बबूल वाला। ..लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर ये टूथपेस्ट बनते कैसे हैं? क्या सच में इनमें नीम, बबूल या नमक होता है या बस इनके कवर पर इनकी तस्वीरें ही होती हैं। आइए खुद ही देख लीजिए कि ये टूथपेस्ट बनते कैसे हैं…
इस विडियो में देखिए भारत में टूथ पेस्ट कैसे बनाए जाते है >>
सचिन तेंदुलकर एक विज्ञापन करता है ! boost is secret of my energy अगर सचिन तेंदुलकर की शक्ति boost है ! तो आप एक काम कीजिये ! सचिन तेंदुलकर की अम्मा को एक चिठी लिखिए ! क्या सचिन तेंदुलकर boost पीकर सचिन बना है ????! हर साल इस देश के लोग 1000 करोड़ रूपये के विदेशी कंपनियो के health tonic खा जाते है !! जिसमे हैल्थ के नाम पर कुछ भी नहीं है !!
health tonic !भारत की सबसे बड़ी लैब है ! Delhi all India institute मे वहाँ के head है doctor जैन !उन्होने चेक करके बताया इन सब हैल्थ tonic मे क्या है !!
हमारे देश में हेल्थ टॉनिक के नाम पर कई विदेशी कंपनियाँ अपने उत्पाद बेचती हैं, जैसे होर्लिक्स, मालटोवा, बोर्नविटा, कॉम्प्लान,बूस्ट, प्रोटिनेक्स और खूबी की बात है कि इनमे हेल्थ के नाम पर कुछ भी नहीं है | कैसे ?
ये कंपनियाँ इन हेल्थ सप्लीमेंट में मिलाती क्या हैं वो भी आप जान लीजिये | मालटोवा, बोर्नविटा, कॉम्प्लान और बूस्ट बनता है मूंगफली (सिंघदाना) की खली से | खली समझते हैं आप ? मूंगफली, सरसों, आदि का तेल निकालने के बाद जो उसका कचरा निकलता है, उसी को खली कहते है और भारत में गाय, बैल,भैंस जैसे जानवरों को खिलाने के लिए इस खली का प्रयोग किया जाता है |
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ये मालटोवा, बोर्नविटा, कॉम्प्लान और बूस्ट इसी मूंगफली की खली से बनाया जाता है, जो खली हमारे देश में जानवरों को खिलाया जाता है वही इस देश में अपने को पढ़े-लिखे और बुद्धिमान कहने वाले लोग खा रहे हैं |
बाजार में आप चले जाइये, ये मूंगफली की खली 20 -25 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मिल जाएगी आपको | आप सौ डब्बे भी इन हेल्थ टोनिकों के खा लीजिये या अपने बच्चों को खिला दीजिये, कुछ नहीं होने वाला उससे | और इसके बदले मूंगफली/सिंघदाना दीजिये गुड के साथ तो जितना प्रोटीन इससे मिलता है, जितनी कार्बोहाईड्रेट इससे मिलती है, या और भी जितनी स्वास्थ्यवर्धक तत्व इससे मिलती है, उतना 100 पैकेट इन उत्पादों के खाने से भी नहीं मिल सकती|
ये अपने डब्बे पर लिखते है कि इससे विटामिन मिलता है, प्रोटीन मिलता है, कैल्सियम मिलता है, वगैरह वगैरह, लिखने में क्या जाता है ? किसी ने कभी टेस्ट कर के कोई समान ख़रीदा है क्या ? अरे मिटटी में भी 18 तरह के Micro Nutrients होते हैं तो क्या हम मिटटी खायेंगे ?
ऐसा ही एक और हेल्थ टॉनिक है – हॉर्लिक्स – हॉर्लिक्स में क्या है ? हॉर्लिक्स में है गेंहूँ का आटा, चने का सत्तू, जौ का सत्तू | बिहार में हम लोग उसको कहते हैं सत्तू और अंग्रेजी में कहते हैं – हॉर्लिक्स | आप किसी से पूछिये कि सत्तू खाओगे ? तो कहेगा कि – क्या फालतू की बात कर रहे हो और पूछेंगे कि हॉर्लिक्स खाओगे तो कहेगा -हाँ हाँ खायेंगे | क्योंकि अंग्रेजी का नाम है, और बड़ा भारी नाम है हॉर्लिक्स | उस पर साफ़-साफ़ लिखा है “It’s malted ” और malted का मतलब ही होता है आटा/सत्तू | जौ का सत्तू, चने का सत्तू बाजार से खरीद लीजिये 50 -60 रूपये किलो मिल जायेगा और और हॉर्लिक्स बिक रहा है 400 रूपये किलो के हिसाब से|
भारतीय बाजार में जितने हेल्थ टोनिक मिल रहे हैं उनसे एक पैसे का हेल्थ नहीं मिलता और भारत के लोग हर साल 1500 करोड़ का हेल्थ टोनिक खरीद कर पैसा विदेश भेज रहे हैं | सिर्फ mental satisfaction है और कुछ नहीं ? हमारे देश के लोग अजीब किस्म के निराशावाद में जी रहे है | ये इग्नोरेंस अनपढ़ लोगों में होता तो मुझे समझ में भी आता लेकिन भारत के पढ़े लिखे लोगों में ये सबसे ज्यादा है |
दोस्तो भारत मे बहुत बड़े बड़े ऋषि हुये ! चरक ऋषि ,पतंजलि ऋषि ,शुश्रुत ऋषि ऐसे एक ऋषि हुए है 3000 साल पहले बाकभट्ट ऋषि ! उन्होने 135 साल के जीवन मे एक पुस्तक लिखी जिसका नाम था अष्टांग हृद्यम उसमे उन्होने ने मानव शरीर के लिए सैंकड़ों सूत्र लिखे थे उनमे से एक सूत्र के बारे मे आप नीचे पढे !
बाग्भट्टजी एक जगह लिख रहे है ! कि जब भी आप आराम करे मतलब सुबह या शाम या रात को सोये तो हमेशा दिशाओ का ध्यान रख कर सोये| अब यहाँ पे वास्तु घुस गया वास्तुशास्त्र | वास्तु भी विज्ञान ही है| तो वो कहते की इसका जरूर ध्यान रखे|
क्या ध्यान रखे ? तो वो कहते है हमेशा आराम करते समय सोते समय आपका सिर सूर्य की दिशा मे रहे ! सूर्य की दिशा मतलब पूर्व और पैर हमेशा पश्चिम की तरफ रहे !और वो कहते कोई मजबूरी आ जाए कोई भी मजबूरी के कारण आप सिर पूर्व की और नहीं कर सकते तो दक्षिण (south)मे जरूर कर ले| तो या तो east या south| जब भी आराम करे तो सिर हमेशा पूर्व मे ही रहे| पैर हमेशा पश्चिम मे रहे !और कोई मजबूरी हो तो दूसरी दिशा है दक्षिण| दक्षिण मे सिर रखे उत्तर दिशा मे पैर|
आगे के सूत्र मे बागभट्ट जी कहते है उत्तर मे सिर करके कभी न सोये| फिर आगे के सूत्र मे लिखते है उत्तर की दिशा म्रत्यु की दिशा है सोने के लिए| उत्तर की दिशा दूसरे और कामो के लिए बहुत अच्छी है पढ़ना है लिखना है अभ्यास करना है ! उत्तर दिशा मे करे ! लेकिन सोने के लिए उत्तर दिशा बिलकुल निषिद्ध है|
अब बागभट्ट जी ने तो लिख दिया| पर राजीव भाई इस पर कुछ रिसर्च किया, तो राजीव भाई लिखते हैं कि गाव गाव जब मैं घूमता था तो किसी कि मृत्यु हो जाती तो मुझे अगर किसी के संस्कार पर जाना पड़ता, तो वहाँ मैं देखता कि पंडित जी खड़े हो गए संस्कार के लिए, और संस्कार के सूत्र बोलना वो शुरू करते हैं| तो पहला ही सूत्र वो बोलते हैं ! मृत का शरीर उत्तर मे करो मतलब सिर उत्तर मे करो| पहला ही मंत्र बोलेंगे मृत व्यक्ति का सिर उत्तर मे करो| और हमारे देश मे आर्य समाज के संस्थापक रहे दयानंद सरस्वती जी| भारत मे जो संस्कार होते है| जन्म का संस्कार है, गर्भधारण का एक संस्कार है ऐसे ही मृत्यु भी एक संस्कार (अंतिम संस्कार) है तो उन्होने एक पुस्तक लिखी है (संस्कार विधि) ! तो उसमे अंतिम संस्कार की विधि मे पहला ही सूत्र है ! मृत का शरीर उत्तर मे करो फिर विधि शुरू करो ! अब ये तो हुआ बागभट्ट जी, दयानंद जी आदि लोगो का, अब इसमे विज्ञान क्या है वो समझे| ये राजीव भाई का अपना explaination है –
क्यूँ ???? आज का जो हमारा दिमाग है न वो क्यूँ ? के बिना मानता ही नहीं ! क्यूँ क्यूँ ऐसा करे ??? कारण उसका बिलकुल सपष्ट है ! आधुनिक विज्ञान ये कहता है आपका जो शरीर है, और आपकी पृथ्वी है इन दोनों के बीच एक बल काम करता है इसको हम कहते हैं गुरुत्वाकर्षण बल (GRAVITATION force )!
इसको आप ऐसे समझे जैसे आपने कभी दो चुंबक अपने हाथ मे लिए होंगे और आपने देखा होगा कि वो हमेशा एक तरफ से तो चिपक जाते हैं पर दूसरी तरफ से नहीं चिपकते ! दूसरे तरफ से वे एक दूसरे को धक्का मारते है ! तो ये इस लिए होता है चुंबक कि दो side होती है एक south एक north ! जब भी आप south और south को या north और north को जोड़ोगे तो वो एक दूसरे को धक्का मारेंगे चिपकेगे नहीं ! लेकिन चुंबक के south और north एक दूसरे से चिपक जाते है !!
अब इस बात को दिमाग मे रख कर आगे पढे
अब ये शरीर पर कैसे काम करता है, तो आप जानते है कि पृथ्वी का उत्तर और पृथ्वी का दक्षिण ये सबसे ज्यादा तीव्र है गुरुत्वाकर्षण के लिए| पृथ्वी का उत्तर पृथ्वी का दक्षिण एक चुंबक कि तरह काम करता गुरुत्वाकर्षण के लिए| अब ध्यान से पढ़े !आपका जो शरीर है उसका जो सिर वाला भाग है वो है उत्तर ! और पैर वो है दक्षिण| अब मान लो आप उत्तर कि तरफ सिर करके सो गए| अब पृथ्वी का उत्तर और सिर का उत्तर दोनों साथ मे आयें तो force of repulsion काम करता है ये विज्ञान ये कहता है ! यह लेख आप राजीव दीक्षित जी डॉट कौम पर पढ़ रहे है..
force of repulsion मतलब प्रतिकर्षण बल लगेगा ! तो आप समझो उत्तर मे जैसे ही आप सिर रखोगे प्रतिकर्षण बल काम करेगा धक्का देने वाला बल !तो आपके शरीर मे संकुचन आएगा contraction. शरीर मे अगर संकुचन आया तो रक्त का प्रवाह blood pressure पूरी तरह से control के बाहर जाएगा !क्यूँ की शरीर को pressure आया तो blood को भी pressure आएगा| तो अगर खून को pressure है तो नींद आएगी ही नहीं| मन मे हमेशा चंचलता रहेगी|दिल की गति हमेशा तेज रहेगी, तो उत्तर की दिशा पृथ्वी की है जो north pol कहलाती है| और हमारे शरीर का उत्तर ये है सिर, अगर दोनों एक तरफ है तो force of repulsion (प्रतिकर्षण बल ) काम करेगा नींद आएगी ही नहीं !
अब इसका उल्टा कर दो आपका सिर दक्षिण मे कर दो ! तो आपका सिर north है उत्तर है ! और पृथ्वी की दक्षिण दिशा मे रखा हुआ है ! तो force of attraction काम करेगा ! एक बल आपको खींचेगा !और आपके शरीर मे अगर खीचाव पड़ेगा मान ली जिये अगर आप लेटे हैं !और ये पृथ्वी का दक्षिण है और इधर आपका सिर है !तो आपको खिंचेगा और शरीर थोड़ा सा बड़ा होगा ! जैसे रबड़ खीचती है न ? elasticity ! थोड़ा सा बढ़ाव आएगा ! जैसे ही शरीर थोड़ा सा बड़ा तो body मे relaxation आ गया !
आप इस पोस्ट को विडियो देखकर ओर बेहतर तरीके से समझ सकते है >>
उदारण के लिए जैसे आप अंगड़ाई लेते हैं न एक दम !शरीर को तान देते है फिर आपको क्या लगता है ? बहुत अच्छा लगता है !क्यूँ की शरीर को ताना शरीर मे थोड़ा बढ़ाव आया और आप बहुत relax feel करते हैं|
इसलिए बागभट्ट जी ने कहा की दक्षिण मे सिर करेगे तो force of attraction है ! उत्तर मे सिर करेगे तो force of repulsion है ! force of repulsion से शरीर पर दबाव पड़ता है| force of attraction से शरीर पर खीचाव पड़ता है ! खीचाव और दबाव एक दूसरे के विपरीत है ! दबाव से शरीर मे संकुचन आएगा दबाव से शरीर मे थोड़ा सा फैलाव आएगा| फैलाव है तो आप सुखी नींद लेंगे, और अगर दबाव है तो नींद नही आएगी है|
इस लिए बागभट्ट जी ने सबसे बढ़िया विश्लेषण दिया है, ये विश्लेषण जिंदगी मे सारे मानसिक रोगो को खत्म करने का उतम उपाय है| नींद अच्छी ले रहे है तो सबसे ज्यादा शांति है, इस लिए नींद आप अच्छी ले ! दक्षिण मे सिर करके सोये नहीं तो पूर्व मे !!
अब पूर्व क्या है ? पूर्व के बारे मे पृथ्वी पर रिसर्च करने वाले सब वैज्ञानिको का कहना है ! की पूर्व नूट्रल है ! मतलब न तो वहाँ force of attraction है ज्यादा न force of repulsion. और अगर है भी तो दोनों एक दूसरे को balance किए हुए हैं, इस लिए पूर्व मे सिर करके सोयेगे तो आप भी नूट्रल रहेंगे आसानी से नींद आएगी ! पश्चिम का पुछेगे जी !?? तो पश्चिम पर रिसर्च होना अभी बाकी है ! बागभट्ट जी मौन है उस पर कोई explanation देकर नहीं गए हैं ! और आज का विज्ञान भी लगा हुआ है इसके बारे भी तक कुछ पता नहीं चल पाया है !
तो इन तीन दिशाओ का ध्यान रखे ! उत्तर मे कभी सिर मत करे ! पूर्व या दक्षिण मे करे !
बस एक अंतिम बात का ध्यान रखे ! को साधू संत है या सन्यासी है ! जिहोने विवाह आदि नहीं किया ! वो हमेशा पूर्व मे सिर करके सोये ! और जो गृहस्थ आश्रम मे जी रहे है, विवाह के बंधन मे बंधे है, परिवार चला रहे है| वो हमेशा दक्षिण मे सिर करके सोये|
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जैसे सर दर्द है, माइग्रेन है, हैड ऐक है, इसकी बहुत अच्छी दवा है गाय का घी| हल्का गरम करो गाय घी और एक एक बूँद रात को नाक में डाल के सो जाओ | सभी तरह के सर दर्द ठीक हो जाएँगे| और गाय घी अगर आप नाक में डालो ना, तो कई बीमारियाँ ठीक होंगी जैसे अगर आपको रात में नींद नहीं आती, बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं तो आप ये गाय घी डाल के सो जाओ बहुत अच्छी नींद आएगी| कई लोग हैं जो रात को सोते समय नाक से संगीत निकालते हैं, और इतना जोरदार संगीत निकलता है की पड़ोसी उनके सो ही नहीं सकते | वो तो मस्त सो जाते है पर पड़ोसी उनके परेशान रहते हैं | उन सभी लोगों की सबसे अच्छी दवा है ये गाय घी | हल्का गरम करो एक एक बूँद नाक में डाल लो | ड्रॉपर की मदद से | गाय घी और बड़े काम में आता है जैसे साइनस, साइनो साइट्स या साइनस, इसकी बहुत अच्छी दवा है ये गाय घी | किसी को भी साइनस की तकलीफ है, कितनी भी पुरानी है, आप उनको बोलो गाय घी डालें नाक में, बहुत जल्दी ठीक होगा | फिस्नो फिलिया, जिनको भी है, उनको बोलो गाय घी डालें नाक में बहुत जल्दी ठीक होगा |
ये विडियो जरुर देखे कैसे गाय का घी अनेको बीमारियों का इलाज करता है >>
और जैसे नाक में कई बार हड्डी बढ़ जाती है, मांस बढ़ जाता है, उसकी बहुत अची दवा है ये गाय का घी, हल्का गरम करके डालना है | ऐसे बहुत लोग आपको मिलेंगे जिनको बहुत ज्यादा छीकें आती हैं, हर समय छींकते हैं नाक से पानी आता है, उनको बोलो गाय घी डाल के रात को सो जायें | कई बार नाक बंद हो जाती है तो मुंह से सांस लेते हैं, गाय का घी डाल दो, एक ही बार में नाक खुल जाएगी | और बहुत गंभीर एक बीमारी में काम आता है गाय घी, जब किसी को ब्रेन स्ट्रोक होता है, पैरालिसिस होता है और हमारे ब्रेन के किसी हिस्से में ब्लड जमा हो जाता है, क्लॉट उसको निकालने की ताकत इस गाय घी में है| आप नाक में डालते रहो एक एक बूँद और जिनको ये तकलीफ है उनको कहना ऐसे करके उसको थोडा सा खींचे वो अन्दर जाएगा|
गाय घी ब्रेन के हर उस पार्ट में पहुँच जाता है जहा मैडिसिन भी नहीं पहुँच सकती| बहुत मज़बूत है, और ये गाय घी कम से कम २८-३० बीमारियाँ ठीक करता है | आपको इसके बारे में एक रोचक बात बताऊँ की ये गाय गी जितना पुराना होता है उतना ही अच्छा| मिलता नहीं कहीं | आप रखो इसको| थोडा थोडा शीशी में बना के रखते जाओ | पुराना जितना होता जाएगा, क्वालिटी बढती जाएगी | और एक समय ऐसा आता है की ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारी…
सर्दी, खांसी और जुखाम ये एक ही परिवार के रोग है और इनके औषोधी (Medicine) भी लगभग एक है : आइये देखते है आपके रसोई मे सर्दी, खांसी और जुखाम के लिए क्या क्या औषधी है !!!!!
यह तिन रोगोंके सबसे अछि औषोधी है अदरक या सोंठ, अदरक को ही दुसरे नाम मे सोंठ कहते है, जब अदरक सुख जाती है तो सोंठ बन जाती है ! दूसरी सबसे अछि औषोधी हल्दी है, तीसरी सबसे अछि औषोधी सर्दी-खासी और जुखाम के चूना है, चौथी सबसे अछि औषोधी दालचीनी है, पांचवी सबसे अछि औषोधी किसमिस है ! इसके साथ कुछ सहयोगी (Complementary) औषोधी है जो मुख्य (Main) औषोधी के साथ मिश्रित करके उपयोग किया जाता है वो है “काली मिर्च, तुलसी का पत्ता, सेहद” |
ये सब ओषधि कैसे लेनी है इसके लिए ये विडियो देखे >>
इन औषोधीयों को लेने का तरीका :
१. अदरक का रस निकाल लीजिये उसको हल्का गरम करके थोड़ा सेहद मिलाके सुबह खली पेट, दोपहर और शाम को एक चम्मच करके पि लीजिये !
२. अदरक के रस के साथ तुलसी का रस मिला लीजिये और हल्का गरम करके सेहद या गुड़ मिलाके सुबह खली पेट, दोपहर और शाम को एक चम्मच करके ले लीजिये !
३. एक ग्लास देशी गाय के दूध मे चौथाई चम्मच हल्दी मिलाके उसको कुछ देर उबालके रात को सोते समय लेना है, अगर दूध उपलब्ध नही है तो पानी मे भी ले सकते है ! अगर आपको काछी हल्दी मिलजाए तो और भी अच्छा है, छोटे टुकड़े करके दूध मे उबाल सकते है !
i) यह हल्दी टोन्सीलाईटिस (Tonsillitis) के भी सबसे अछि औषोधी है ! राजीव भाई के अनुसार बच्चो के टोन्सीलाईटिस का ऑपरेशन नही करना चाहिए – टोन्सीलाईटिस अगर Chronic है माने पुराना है तो हल्दी को सीधा इस्तेमाल करना है, चम्मच मे आधा हल्दी भरके उसको मुह के अन्दर ले जा के हल्दी डाल देना है फिर लार के साथ मिलके हल्दी अन्दर जाएगी, इस समय पानी नही देना है एक घंटे तक | हफ्ते मे अगर आप तिन दिन यह कर लिया, तो चौथे दिन बच्चे के टोन्सीलाईटिस ठीक हो जाएगी ! और टोन्सीलाईटिस अगर एक्यूट (Acute) है माने हाल फ़िलहाल मे हुआ है तो आप दूध मे या पानी मे हल्दी मिलाके लीजिये |
ii) (Throat Infection) गले की खराश, या गले मे किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन हो, गला बैठ गया है, पानी पिने मे भी तकलीफ हो रही है, लार निकलने मे भी तकलीफ हो रही है, आवाज भरी हो गयी है .. इन सबके लिए एक ग्लास देशी गाय का दूध, एक चम्मच देशी गाय का घी और चौथाई चम्मच हल्दी को मिलाके कुछ देर उबालना है फिर उसको सिप सिप करके चाय की तरह पीना है शाम को एकबार |
४.गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोजा सुबह खाली पेट एक कप दही, डाल, गन्ने का रस या पानी मे मिलाके पिए!
आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद अब आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके जानकारी को अन्य लोगो तक पहुचाए
अक्सर हमें हमारी माँ और बुढ़े लोग हमें कहते हैं कि इस तरफ पैर करके मत सो इस दिशा में पैर करके आपको नहीं सोना चाहिए इत्यादि। हम उनसे सवाल तो बहुत पुछते हैं कि आखिर क्यों नहीं इस दिशा में पैर रखकर नहीं सोना चाहिए, या इस दिशा में ही क्यों पैर रखने चाहिए। दरअसल यह कोई अंधविश्वास नहीं है यह वैज्ञानिको द्वारा सिद्ध बात है। हम इसलिए आज इसको लिख रहे हैं क्योंकि बहुत से लोग अभी भी इस बात से अनभिज्ञ हैं। आईये इस विडियो के माध्यम से जानते हैं
चाय जो आप बनाते है उसमें चाय से ज्यादा नुकसानदायक चीनी है । ये जो शुगर है ना, चीनी इसका चाय के साथ कोई मेल नहीं है । अगर आप चाय पी रहे है, वैसे तो मत पीये क्यांकि आपके तासीर के अनुकूल नहीं है । चाय के जो केमिकल है ना ? भारत के लिए उपयोगी नहीं है । युरोप और अमेरिका के लिए बहुत अच्छा है । गरम देशों मे चाय, कॉफी ठीक नही है ।
फिर भी अगर आप पी रहें है, आप मानते है खराब है लेकिन आदत है तो में एक तरीका बता देता हूँ । वो तरीका ये है की चीनी की जगह गुड का चाय पीजिये । क्यों पीये ? वो समझ लीजीए, गुड जो है ना, क्षारीय है। और चीनी अम्लीय है । चीनी जब डिसइंटिग्रेड (Disintegrate) होती है तो अंतिम परिणाम जो है वो एक एसिड के रूप में ही है । और गुड जब डिसइंटिग्रेट होता है । तो उसको अंतिम परिणाम क्षारीय है । पेट में वैसे ही आम्ल ज्यादा है और सुबह पेट में ज्यादा आम्ल होता है और उस समय अगर चीनी मिलाई हुई चाय पीयेंगे तो ये एसिडिटी बढाएगी आपकी ।
चाय पर राजीव दीक्षित जी का ये विडियो जरुर देखे >>
तो बेहतर है आप चाय पीये तो गुडवाली पीये । अब गुडवाली चाय जब पीये तो दूध नहीं डाल सकते, क्योंकि दूध फट जायेगा गुड में । क्योंकि दूध् और गुड की दोस्ती नही है । तो फिर बीना दूध् की चाय पीये । तो आप काली चाय पीये । गुड डाल के पीये । और मेरी छोटी सी बात अगर मान ले, की काली चाय अगर गुड डालकर आप पी रहे है तो थोडा-सा नींबू का रस डालेंगे तो न्यूट्रलाईज होगी ये । नींबू का रस एसिडिटी है, गुड का रस क्षारीय है । तो गुड मिलायी हुई चाय को अगर न्यूट्रल करना है तो थोडा नींबू डालकर नींबू की चाय पीये । ठीक है ? लेकिन इसको पीने से पहले पानी जरूर पीये । वो नियम ना भूले । गुड डाला चाय में तो क्षारपण आया तो थोडा नींबू डालेगे तो न्यूट्रल हो जायेगा । वो आप पीये तो जीवनभर बिना किसी दुःख और तकलीफ आप पी सकते है । और अगर आपको बन पाए तो हरे पत्ते की चाय पीये । ये जो चाय आती है ना, बाजार में, टी स्पून ये आपके लिए अच्छी नहीं है । आपको हरे पत्तेवाली चाय मिल रही है तो कम से कम इतना जरूर फायदा है कि वो एंटी ऑक्सिडंटल प्रॉपर्टी वाली है क्यांकि हरे पत्तों को सीधे निकालकर, सुखाकर आप बना रहे है । तो वो इससे बेहतर है जो चूरे वाली चाय आप पी रहे है । थोडी बेहतर है ।
चीनी को सफेद ज़हर कहा जाता है जबकि गुड़ स्वास्थ्य के लिए अमृत है क्योंकि गुड़ खाने के बाद यह शरीर में क्षार पैदा करता है जो हमारे पाचन को अच्छा बनाता है (इसलिये वागभट्टजी ने खाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़खाने की सलाह दी है) जबकि चीनी अम्ल पैदा करती है जो शरीर के लिए हानिकारक है। गुड़ को पचाने में शरीर को यदि 100 कैलोरी ऊर्जा लगती है तो चीनी को पचाने में 500 कैलोरी खर्च होती है। गुड़ में कैल्शियम के साथ-साथ फास्फोरस भी होता है जो शरीर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है और अस्थियों को बनाने में सहायक होता है। जबकि चीनी को बनाने की प्रक्रिया में इतना अधिक तापमान होता है कि फास्फोरस जल जाता है चीनी में कोई प्रोटीन नहीं, विटामिन नहीं, कोई सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं होता केवल मीठापन है और वो मीठापन भी शरीर के काम का नही ! इसलिये अच्छे स्वास्थ्य के लिए गुड़ का उपयोग करें।
गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और कुछ मात्रा मे कॉपर जैसे स्वास्थ्य वर्धक पदार्थ होते हैं। आँकड़ों के अनुसार गुड़ में ब्राउन शुगर की अपेक्षा पाँच गुना अधिक और शक्कर की अपेक्षा पचास गुना अधिक मिनरल्स होते है। गुड़ की न्यूट्रीशन वैल्यू शहद के बराबर है। बच्चे के जन्म के बाद माता को गुड़ देने से कर्इ बड़ी बीमारियां दूर होती हैं यह मिनरल्स की कमी को दूर करता है बच्चे के जन्म के 40 दिनों के अन्दर माता के शरीर में बनने वाले सभी ब्लड क्लाट्स को खत्म करता है। गुड़ आधे सिर के दर्द से बचाव करता है स्त्रियों में मासिक धर्म से सम्बंधित परेशानियों को ठीक करता है और शरीर को ठंडा रखता है।
गुड के बारे में अधिक जानकारी के लिये ये विडियो जरुर देखे >>
रात को जब हम सोते है तो हम किस तरह की करवट लें यह हमें पता नहीं होता है। कभी हम दाई ओर करवट लेते है तो कभी बाई ओर तो कभी औधें मुंह ले जाते है। जिससे हमें लगता है कि आराम मिल रहा उस तरफ हम करवट करके लेट जाते है।
आपको यह बात पता है कि रात को जब हम सोते है तो हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारे इस करवट से हमारे शरीर के अंगों के साथ-साथ दिमाग में भी फर्क पडता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बाएं ओर करवट लेकर सोने से आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इससे आप कई बीमारियों से बच जाएगे। लेकिन कई बार रात को सोत वक्त खुद न पता होता है कि हम किस पोजीशन में लेते है। इसलिए कोशिश करें कि बाई ओर पोजीशन पकड़कर सोए। इससे हमें पेट संबंधी कई समस्याओं से निजात मिलेगा साथ ही आपका दिमाग सुचारु रूप से काम करेगा।
अगर आपको पेट संबंधी जैसे पेट का फूलना, गैस बनना, एसिडिटी की समस्या आदि है तो इससे आपुको फायदा मिल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार माना जाता है कि बाएं ओर करवट लेकर सोने से शरीर में जमा होने वाले टॉक्सिन धीरे-धीरे लसिका तंत्र द्वारा निकल जाते हैं, क्योंकि बाई ओर सोने से हमारे लीवर पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं पड़ता, इसलिए यह टॉक्सिन शरीर से बाह निकलने में सफल हो जाते हैं। जिससे आप कई बीमारियों से बच जाते है।
बाएं ओर सोने के कारण ग्रेविटी, भोजन को छोटी आंत से बड़ी आंत तक आराम से पहुंचाने में मदद करती है। जिसके कारण आपका सुबह आपका पेट आसानी से साफ हो जाता है।
आप जानते है कि हमारे शरीर में सबसे ज्यादा गंदगी हमारे लीवर और किडनियों में पाई जाती है। इसी कारण रात को सोते समय इसमें ज्यादा प्रेशर पडता है। जिसके कारण हमें एसिडिटी की समस्या हो जाती है।बाएं ओर करवट कर के सोने से ये दोनों ही अपने काम ठीक प्रकार से करते हैं। इससे ज्यादा बाइल जूस निकलता है जिससे वसा ठीक प्रकार से पचता है। साथ ही लीवर में फैट जमा नहीं हो पाता।
आपने कभी देखा की गाय के घी का विज्ञापन होता है? क्योंकि उसमें क्वालिटी होती है | डालडा का विज्ञापन बार बार होता है क्योंकि क्वालिटी नहीं होती | गाय के दूध का विज्ञापन नहीं करना पड़ता | डेरी के पैकेट वाले दूध विज्ञापन के बिना बिकता नहीं है | आपने कभी गुड का विज्ञापन नहीं देखा होगा क्योकि उसमे क्वालिटी होती है इसका मतलब ये कि जो चीज़ जितनी रद्दी होगी क्वालिटी में उसका विज्ञापन उतना ज्यादा ही होगा | आप एक बात समझ ले विज्ञापन का मतलब ही गंजे को कंगा बेचना होता है, मैं बहनों से माताओ से एक विनती करना चाहता हूँ कि ये विडियो देखिए और इसके प्रभावों को जानकर अपने और अपने परिवार के शरीर को बीमारी से बचाए :-
राजीव भाई और आयुर्वेद के अनुसार खाना बनने के बाद 48 मिनट के अन्दर खाना चाहिए, तो जो बच्चे सुबह स्कूल को जाते है और शाम को वापस घर लौटते है, उनका क्या ?
उत्तर: इसके लिए में एक विकल्प बताता हूँ, जो बच्चे सुबह-सुबह स्कूल को जाते है उनके लिए ये सूत्रा कैसे अप्लाई होगा । मेरी विनंती है कि बच्चों को खाना खिला के स्कूल भेजिए । आप बोलेंगे जी, खाते नहीं है । मै आपको इसका तरीका बताता हूँ कि वो खाना कैसे खायेंगे । हमारे शारीर की अपनी एक साइकल है । साइकल ये है कि कोई भी खाना खाए तो आपको आँठ घंटे के बाद ही भूख लगेगी । ये शरीर का अपना नियम है, जो बच्चों के लिए, पुरुषों के लिए, सबके लिए है । तो खाना खाने के आँठ घंटे बाद ही भूख लगेगी, रात का खाना उनको उस समय खिला दीजिये जो सुबह तक अंत घंटे पूरे हो जाए। मतलब कि अगले दिन शाम को ही खाना खिला दीजिये । रात को मत खिलाइए । शाम को 6 बजे तक अगर आपने खाना खिला दिया तो 8-9 बजे तक उनको नींद आ ही जाएगी क्योंकि खाना खाने के डेढ़ घंटे बाद जैसे ही खाना पच के रस में बदलता है, शरीर का ब्लड-प्रेशर अपने आप बढ़ाना शुरू कर देता है, और ब्लडप्रेशर बढे तो नींद आनी ही है, रुक नही पाएँगे आप। तो शाम का खाना 6 बजे खिला दीजिये, आँठ बजे उनको नींद आ जाएगी। 6 बजे से आँठ घंटा गिनेंगे तो सुबह चार-पाँच बजे तक वो पूरा हो जायेगा । चार-पाँच बजे के आस-पास जब वो सो कर उठेंगे तब इतनी तेज भूख लगी होगी और आप रोटी, दाल, चावल जो खिला दोगे वो वही खाके चले जाएँगे ।
इस नियम को अच्छे से समझने के लिये ये विडियो देखे >>
आप को थोडा बदल ये करना है की, रात को हम 10 बजे बच्चों को खाना खिला रहे है, या 11 बजे खिला रहे है, उसके 2 घंटे बाद रस बन रहा है, तो 3-4 बजे तक आधा खाना पचा, आधा नहीं पचा, तो उन्हें उठने पर भूख नहीं लगेगी| तो आप शाम का खाना जल्दी खाने लगे, माने सब लोग जैन ही हो जाइये, हाँ परोक्ष रूप से में ये कहता हूँ की, जैन धर्म आप पालन करे, महत्व का है, ध्रा करे वो उतना महत्व का नहीं है । आप आचार्य श्री को वंदन करे, बहुत अच्छा ! नहीं करे, तो शाम का खाना तो 6 बजे खा ले, तो आचार्य श्री को वंदन करने से भी बड़ा काम करेंगे । वो आचार्य श्री भी यहीं कहते है की, शाम का खाना जल्दी खाओ । तो आप थोड़े जैन ही हो जाइये, आपका भी खाना ख़राब नहीं है, बहुत अच्छा है लेकिन रात को खाना बंद कर दीजिये । बच्चों को रात का खाना बिलकुल बंद कर दीजिये, मै आपको विनम्रतापूर्वक कह रहाँ हूँ और इसको मै कल या परसों इसका अर्थ समझाउंगा। आज अपने पूँछ लिया इसलिए कह रहाँ हूँ, रात का खाना बिलकुल बंद कर दीजिये क्योंकि, बागवट जी का ये पहला सूत्र है, ये अभी मैंने आधा ही बताया है, सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श.. हर समय खाना बनाते समय, खाते समय, पीते समय, रहना ही चाहिए । 6 बजे के बाद तो सूर्य प्रकाश रह नहीं सकता, और आप जानते है, सूर्यप्रकाश का सबसे बड़ा परिणाम विटामिन ‘डी’ का निर्माण, इसलिए सूर्य का प्रकाश जब तक है तो खाना खाए तो विटामिन डी । इसलिए बच्चों को तो रात का खाना बिलकुल बंद कर दीजिये । सुबह 7 बजे जब स्कूल जायेंगे, तो खूब भूख लगी होगी, सांत बजे पराठा बना के खिलाइए, आलू का भी पराठा बना के खिलाइए गोभी का भी बना के खिलाइए तो भी कोई पफरक नहीं पड़ता । इस पर मै आगे बात करूँगा, सुबह का भोजन जितना हैवी हो उतना अच्छा । तो बच्चों को भरपेट खाना खिला के स्कूल में भेजिए, लंच बॉक्स की जरुरत नही है, दोपहर को आते ही खाना खिलाइए और शाम को दूसरा भोजन, रात का भोजन बंद किया तो सुबह उठाते ही भूख लगती है। मैंने कुछ बच्चों पर प्रयोग किया, रात का भोजन बंद कर दिया, ये तो प्रकृति का नियम है । सारे जानवर, सारे पक्षी उठाते ही खाना खाते है आप देखिये, चिड़िया है सुबह-सुबह खाना खाने लगेगी, गाय, बैल भैंस, क्योंकि वो शाम को सूर्य के बाद खाना नहीं खाते,गाय रात को खाना नहीं खाती, खिला के देखो ! जर्सी गाय को छोड़कर ! जर्सी भारत की नहीं है इसलिए उसको भारत का पता नहीं है, वो रात को 2 बजे भी खा लेगी । भारत की कोई भी गाय, भारत के नस्ल की गाय 6 बजे के बाद खाना नहीं खाएगी, तो भारत के तासीर को ध्यान में रखकर भोजन जल्दी करिए, सुबह भरपूर भूख लगेगी । और निवेदन इतना ही करता हूँ कि खाली पेट तो कभी बच्चों को स्कूल मत भेजिए । आप ने कहाँ कि दूध पीकर गया है, मतलब खाली पेट ही स्कूल गया है क्योंकि दूध सॉलिड भोजन नहीं है । ऐसा भोजन सुबह शरीर में जाना बहुत ही आवश्यक है, अगर भविष्य में आप उसको एसीडिटी, अल्सर, सेप्टिक अल्सर से बचाना चाहते है तो ।
में अपने अनुभव से या खुद आप अपने अनुभव से ये बात कह सकते हैं की दुनिया मैं अगर भोजन पर सबसे ज्यादा रिसर्च अगर कहीं हुईं तो वो भारत मैं हुईं और अगले हजारों सालों में होगी तो वो भारत में ही होगी । क्यों ? दूसरे देशों में भोजन ही नहीं हैं, रिसर्च क्या करेंगे? वो भोजन कब को रिसर्च करे.. आप में से बहुत सारे लोग यूरोप,अमेरिका में गए होंगे, आप देखिये भोजन क्या हैं उनके पास.. ले देंगे के एक पाँव की रोटी या डबल रोटी, अब वो आलू से खा लो या प्याज से खा लो, प्याज से खा लो या आलू से खा लो,उसको बीच में काट कर प्याज भर लो या फिर प्याज बगल में रख कर खा लो, उसको पिझ्झा कह दो, बर्गर कह दो, हॉट डॉग कह दो, कोल्ड डॉग कह दो वो प्रिपरेशन तो एक ही हैं ना ? और वो प्रिपरेशन है मैदा का, मैदा को सड़ाकर बनाया हुआ इसके अलावा उनके पास कुछ है नहीं जिसे फ़ूड स्टफ कहाँ जाये माने सॉलिड भोजन! और अगर हम भारत की बात करे तो यहा एक से एक भोजन है . अगर आप रोज अलग भोजन करे तो आपकी उम्र निकल जाएगी लेकिन भोजन ख़तम नहीं होंगे इतने भोजन है, आपसे हाथ होड़कर प्रार्थना है कि ये विडियो देखे और इनके दुष्परिणाम को जानकर अपने और अपने परिवार की बिमारियों से रक्षा करे
विडियो में दिखिए टमाटर कैचप ओर ब्रैड या डबल रोटी के दुष्परिणाम >>
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जिसका आकार अ्खरोट के बराबर होता है। यह पुरुष के मूत्राषय के नीचे और मूत्रनली के आस-पास होती है। ५० की आयु के बाद बहुधा प्रोस्टेट ग्रन्थि का आकार बढने लगता है।इसमें पुरुष के सेक्स हार्मोन प्रमुख भूमिका होती है। जैसे ही प्रोस्टेट बढती है मूत्र नली पर दवाब बढता है और पेशाब में रुकावट की स्थिति बनने लगती है। पेशाब पतली धार में ,थोडी-थौडी मात्रा में लेकिन बार-बार आता है कभी-कभी पेशाब टपकता हुआ बूंद बूंद जलन के साथ भी आता है। कभी-कभी पेशाब दो फ़ाड हो जाता है। रोगी मूत्र रोक नहीं पाता है। रात को बार -बार पेशाब के लिये उठना पडता जिससे नीद में व्यवधान पडता है। इस विडियो में इस प्रकार की सभी बीमारियों का इलाज जाने |
विडियो में राजीव भाई से सुनिए इस तरह की सभी बिमारियों का इलाज >>
ऐसे बर्तन आज कल हर घर में देखे जा सकते है, इस तरह की खास क्राकरी जो सफेद, पतली और अच्छी कलाकारी से बनाई जाती है, बोन चाइना कहलाती है। इस पर लिखे शब्द बोन का वास्तव में सम्बंध बोन (हड्डी) से ही है। इसका मतलब यह है कि आप किसी गाय या बैल की हड्डियों की सहायता से खा-पी रही है। बोन चाइना एक खास तरीके का पॉर्सिलेन है जिसे ब्रिटेन में विकसित किया गया और इस उत्पाद का बनाने में बैल की हड्डी का प्रयोग मुख्य तौर पर किया जाता है। इसके प्रयोग से सफेदी और पारदर्शिता मिलती है।
बोन चाइना इसलिए महंगा होती है क्योंकि इसके उत्पादन के लिए सैकड़ों टन हड्डियों की जरुरत होती है, जिन्हें कसाईखानों से जुटाया जाता है। इसके बाद इन्हें उबाला जाता है, साफ किया जाता है और खुले में जलाकर इसकी राख प्राप्त की जाती है। बिना इस राख के चाइना कभी भी बोन चाइना नहीं कहलाता है। जानवरों की हड्डी से चिपका हुआ मांस और चिपचिपापन अलग कर दिया जाता है। इस चरण में प्राप्त चिपचिपे गोंद को अन्य इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है। शेष बची हुई हड्डी को १००० सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है, जिससे इसमें उपस्थित सारा कार्बनिक पदार्थ जल जाता है। इसके बाद इसमें पानी और अन्य आवश्यक पदार्थ मिलाकर कप, प्लेट और अन्य क्राकरी बना ली जाती है और गर्म किया जाता है। इन तरह बोन चाइना अस्तित्व में आता है। ५० प्रतिशत हड्डियों की राख २६ प्रतिशत चीनी मिट्टी और बाकी चाइना स्टोन। खास बात यह है कि बोन चाइना जितना ज्यादा महंगा होगा, उसमें हड्डियों की राख की मात्रा भी उतनी ही अधिक होगी।
इस विडियो में देखिए बॉन चाइना के बर्तन कैसे बनते है >>
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या शाकाहारी लोगों को बोन चाइना का इस्तेमाल करना चाहिए? या फिर सिर्फ शाकाहारी ही क्यों, क्या किसी को भी बोन चाइना का इस्तेमाल करना चाहिये। लोग इस मामले में कुछ तर्क देते है। जानवरों को उनकी हड्डियों के लिए नहीं मारा जाता, हड्डियां तो उनको मारने के बाद प्राप्त हुआ एक उप-उत्पाद है। लेकिन भारत के मामले में यह कुछ अलग है। भारत में भैंस और गाय को उनके मांस के लिए नहीं मारा जाता क्योंकि उनकी मांस खाने वालों की संख्या काफी कम है। उन्हें दरअसल उनकी चमड़ी और हड्डियों के मारा जाता है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी चमड़ी मंडी है और यहां ज्यादातर गाय के चमड़े का ही प्रयोग किया जाता है। हम जानवरों को उनकी हड्डियों के लिए भी मारते है। देखा जाए तो वर्क बनाने का पूरा उद्योग ही गाय को सिर्फ उसकी आंत के लिए मौत के घाट उतार देता है। आप जनवरों को नहीं मारते, लेकिन आप या आपका परिवार बोन चाइना खरीदने के साथ ही उन हत्याओं का साझीदार हो जाता है, क्योंकि बिना मांग के उत्पादन अपने आप ही खत्म हो जायेगा।
चाइना सैट की परम्परा बहुत पुरानी है और जानवर लम्बे समय से मौत के घाट उतारे जा रहे हैं। यह सच है, लेकिन आप इस बुरे काम को रोक सकते हैं। इसके लिए सिर्फ आपको यह काम करना है कि आप बोन चाइना की मांग करना बंद कर दें।
इस विडियो में देखिए जानवरों को कतल करके इसके आलावा और क्या क्या बनाया जाता है
पानी कैसे पिए ? हमारे यहाँ पानी पीने के बहुत तरीके हैं । लोटा होठों से लगाया, गटगटगट उतार दिया, गिलास मुह से लगाया, बोतल मुह से लगाईं और पी गए| बागवट जी कहते है पानी पीने का ये तरीका बिल्कुल गलत है । वो कहते है कि पानी को चुस्कियां ले-लेकर पीयो, घूँट-घूँट भर के पानी पिए। सीप सीप ले-लेकर पानी पिए, ऐसे पानी पीने को बोला है । जैसे आप गरम दूध् पीते है न, बागवटजी बिल्कुल उसे समक्ष रखते है । गरम दूध् आप जैसे सीप-सीप लेकर, घूँट-घूँट भर के पीते है, वैसे ही पानी पिए। अब ये क्यों ? ये समझ लेते है ।
आप एकसाथ इतना पानी उतार रहे है गले के नीचे और एक-एक घूँट पानी उतारे गले के नीचे दोनों में जमीन आसमान का अंतर है । अंतर ये है कि मै आपको एक महत्व की बात समझाना चाहता हूँ वो जन्मभर याद रहे तो आपके लिये बहुत अच्छा । हमारे पेट में भोजन को पचाने के लिए अग्नी होती है । और इस अग्नी को तीव्र करने के लिए एसिडिक अमल होता है । आप जानते है, पेट में अम्ल बनता है और भगवान ने ऐसी व्यवस्था की है, कि जब पेट में अम्ल बनता है तो मुँह में राल बनता है, जिसको लार कहते है, लार..लाळ, सलायव्हा, लालारस अलग-अलग नामों से आप उसे जानते है । ये है क्षार। आप थोडा भी अगर विज्ञान जानते है तो आप जानते है की क्षार और अमल को मिलाओ तो हो जाता है न्यूट्रल, मतलब कि सामान्य जोकि एक लवण होता है। तो अमल और क्षार जिस समय मिलते है तो न्यूट्रल होते है । अमल का मतलब है जिसका Ph 7 से कम है और क्षार का मतलब है जिसका Ph 7 से ज्यादा है । और न्यूट्रल का मतलब है जिसका 7 है ये जो पानी है ना पानी ये ना अमल है, ना क्षार है, न्यूट्रल है
विडियो में राजीव भाई से सुनिए क्यों ये तरीका सबसे बेहतरीन है >>
बागवटजी कहते है कि पेट आपका अक्सर पानी के जैसा रहे तो अच्छा । और जिनका पेट पानी के जैसा माने पेंट की अम्लता ना बढे, जिनका क्षारपण भी ना बढे Ph 7 के आसपास रहे तो बागवटजी कहते है ऐसे व्यक्ती को 100 से ज्यादा वर्ष जीने की पूरी गारंटी है, बिना एक भी दवा खाये और बिना चिकित्सक के पास जाये । अब आपके पेट मे अमल बन रहा है, मुँह मे लार बन रही है अगर पानी आप घुट घुट भर पी रहे है तो पानी के साथ ये लार मिलके अंदर जाती है । और पानी एकसाथ गटगटगट पीते है तो कम लार पानी के साथ लार मिलकर अंदर जाती है । ये लार बन रही है अंदर जाने के लिए बाहर निकलने के लिए नही । क्योंकि अंदर पेट के अमल को रखना है इसके लिए क्षार है । तो ये घुट-घुट सीप-सीप लेकर आपने पानी पिया तो ज्यादा लार अंदर जाएगी तो अमल को शांत करने मे मदत आएगी। इसलिए आपका पेट न्यूट्रल रहेगा और आपकी जिंदगी बिना किसी दवा और रोग के आराम से 100-150 साल हो जाएगी। इसलिए पानी घुट भर भर के पीये । और एकसाथ गटगट पानी पीयेंगे तो लार पानी के साथ मिल नहीं पाएगी तो अंतिम रूप मे वो पानी तो खाली पानी होगा और वो उतना न्यूट्रलाईज नहीं कर पायेगा, पेट को सामान्य अवस्था मे नहीं ला पाएगा। हालात की, पानी भी अमल को कम करता है क्योकि अमल में पानी मिले तो अमल की ताकद कम होती जाती है। पानी तो कम करेगा वो बिल्कुल अद्भूत होगा| बागवट जी आगे ये कहते है कि जो व्यक्ति सीप सीप लेकर पानी पीये वो देखे जानवर कैसे पीते है चिडिया कैसे पानी पीती है? एक ड्रॉप उठाती है फिर उसको ऐसे मुह मे चलाएगे फिर पीयेगी फिर दूसरी ड्रॉप उठाएगी फिर ऐसे ऐसे चलाएगी फिर पायेगी । ऐसे ही कुत्ता है पानी को चाट चाट के पीयेगा, शेर पानी को चाटचाट के पीयेगा, ज्यादातर जानवर ऐसे ही पीते है वो जानवर हमसे ज्यादा स्वस्थ होते है। किसी को डायबिटीस नही है। कोई ओव्हरवेट नहीं है। किसी को पेन/दर्द नहीं क्योंकि वो पानी को पीने का नियम जानते है । बागवट के पक्के चेले है ये सब जानवर। बिना बोले और बिना सुने वो आप भी हो जाईए । बागवट जी कहते है पानी थोडा लिजिए जैसा चिडिया पीती है उसको चिडिया मुह में ऐसे ऐसे घुमाती है तो आप भी पानी को थोडा घुमाईये फिर पीजीए । थोडा पानी लिजीए मुह में घुमाईये फिर पीजीए बाद मे इधर -उधर का सब लार अंदर जाए। अब वो ये कहते है की कोई रोग आने की संभावना नही है । राजीव भाई ने ये किया है उन्होंने 6 साल भागवट जी को पढ़ा था, ओर 3 साल पढने में लग गया और 3 साल समझने मे लग गया । तो 6 साल पहले राजीव भाई ने ये सूत्र पढा था तो मैंने कहा यार कुछ लोग बहुत बिमार है, तो राजीव भाई ने सोचा ये करके देखता हु, गलत तो रिझल्ट आनेवाला नहीं । तो आप को सुनकर हैरानी होगी राजीव भाई के दोस्त सहयोगी है जिनका वजन ज्यादा था उन्होंने पानी सीप सीप लेकर पिना शुरू कर दिया । और भोजन के डेढ घंटे बाद पानी पिना शुरू किया । ये दोही सुत्रों का परिणाम है सबके वजन पहले से आधे हो गये एक तो राजीव भाई का दोस्त था जिसको राजीव भाई कभी भी आप के सामने खडा कर सकते थे । 140 किलो का था वो । और एक सव्वा साल हो गया लगभग अभी 70 किलो का है बिना कोई दवा खायें बिना भोजन में कोई बदलाव किए। सिर्फ पानी पीने का तरीका बदला फिर मैंने डॉक्टरो से बात की, ये चक्कर क्या है? तो उन्होने कहॉं की बात सीधी है जो लार है ना, ये दुनियां की सबसे अच्छी ओषधि है । इसकी मेडिशनल प्रॉपर्टी सबसे जादा है । आप ने जनावरो को देखा होगा उन्हे कभी कोई चोट लगी तो वो आपने लार से ये ही ठीक कर लेते है । क्योकि उसमे मेडिसीन है । वो मनुष्य की लार मे भी है । अब वो ये कहते है कि भारत के वो मनुष्य बहुत ही दुर्भाग्य शाली है तो इस लार को अंदर ले नही जा पाते जैसे तंबाखू खाने वाले लोग थुंकते ही रहते है । गुटखा, मावा खाने वाले लोग थुंकते ही रहते है। ]डॉक्टर कहते है कि वो जिंन्दगी के सबसे महत्वपूर्ण चीज को थूँक रहे है जिसको बनाने के लिए भगवान ने एक लाख ग्रंथियां आपके मुह मे दी है । आप जानते है ये लार तैयार होने में एक लाख ग्रंथियों का काम होता है । ये ग्रंथियां दिन रात लार बनाती है ये बहुत ही कीमती है इसका औषधीय गुण बहुत ज्यादा है, और आप उसको थूँकते ही रहते है, आप सडक तो खराब करते ही है । साथ में अपने आपको उससे ज्यादा खराब करते है, तो मेरी हाथ जोड करके विनंती है कि आप मे से कोई लार थूँकने वाला हो, थूँकने वाला आदमी ये तो बागवटजी के डिक्शनरी मे नहीं है । वो कहते है कि एक ही कंडीशन मे आप थूक सकते है जब कफ बहुत बडा हुआ हो । उसके अलावा दुसरी कोई कंडीशन नहीं की आप थूँके । तो यहा तो बिना कफ बडे तंबाखू गुटखा थूँकते रहते है ये थूँकने नुकसानदायक तो है ही तंबाखू गुटखा भी नुकसानदायक है ओर उससे भी ज्यादा नुकशानदायक थूकना। फिर आप कहेगे जी पान खाये तो । पान खाने का भी नियम बताया है बहुत माइक्रो लेवल पर कॅल्क्युलेशन है बागवटजी का ! वो कहते है की पान खाओ तो कथ्था मत लगाओ बीना कथ्थे का पान खाओ थूकने की जरुरत नहीं पड़ेगी। कथा है तो थूकना पड़ेगा इसलिये कथा लगाओ ही मत| जो भी खाओगे वो चुना है, क्लॅशिअम है अंदर जायेगा । और वो क्लॅशिअम क्या क्या अद्भूत काम करने वाला है वो आप दुसरे पोस्ट में देख सकते है| हमारे पुराने बुजुर्ग जो तंबाखू या कथ्थे का नही सिर्फ चुना लगाके पान खाते है वो बागवट के चेले है शिष्य है सबके सब । तो पान भी खाएँ तो थूँकना नहीं लार के साथ पान अंदर जाना चाहिए क्योकि एक है वातनाशक और दुसरा है पित्तनाशक । और कफ का नाश पान करता है और चुना वात का नाश कर देता है तो वात पित्त कफ तीनों ही संतुलित है । तो पान खाकर जिंदगीभर निरोगी रह सकते है
भारत मे कुल 3600 बड़े कत्लखाने है जिनके पास पशुओ को काटने का लाईसेंस है !! जो सरकार ने दे रखा है ! इसके इलावा 35000 से अधिक छोटे मोटे कत्लखाने है जो गैर कानूनी ढंग से चल रहे है ! कोई कुछ पूछने वाला नहीं ! हर साल 4 करोड़ पशुओ का कत्ल किया जाता है ! जिसने गाय, भैंस, सूअर, बकरा, बकरी, ऊंट, आदि शामिल है ! मुर्गीया कितनी काटी जाती है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है ! गाय का कतल होने के बाद मांस उत्पन्न होता है और मांसाहारी लोग उसे भरपूर खाते है | भारत के 20% लोग मांसाहारी है जो रोज मांस खाते है और सब तरह का मांस खाते है | मांस के इलावा दूसरी जो चीज प्राप्त की जाती है वो है तेल ! उसे tallow कहते है जैसे गाय के मांस से जो तेल निकलता है उसे beef tallow और सूअर की मांस से जो तेल निकलता है उसे pork tallow कहते है |
विस्तार से जानने के लिये विडियो में भी देख सकते है..
इस तेल का सबसे ज़्यादातर उपयोग चेहरे में लगाने वाली क्रीम बनाने में होता है जैसे Fair & Lovely , Ponds , Emami इत्यादि | ये तेल क्रीम बनाने वाली कंपनियो द्वारा खरीदा जाता है ! और जैसा कि आप जानते है मद्रास high court मे श्री राजीव दीक्षित जी ने विदेशी कंपनी fair and lovely के खिलाफ case जीता था जिसमे कंपनी ने खुद माना था कि हम इस fair and lovely मे सूअर की चर्बी का तेल मिलाते हैं ! आप यहाँ click कर देख सकते है ! तो क्त्ल्खानों मे मांस और तेल के बाद जानवरो का खून निकाला जाता है ! कसाई गाय और दूसरे पशुओ को पहले उल्टा रस्सी से टांग देते हैं फिर तेज धार वाले चाकू से उनकी गर्दन पर वार किया जाता है और एक दम से खून बहने लगता है नीचे उन्होने एक ड्रम रखा होता है जिसने खून इकठा किया जाता है यहाँ click कर देख सकते हैं ! तो खून का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है अँग्रेजी दवा (एलोपेथि दवा) बनाने मे ! गाय के शरीर से निकला हुआ खून ,मछ्ली के शरीर से निकला हुआ खून बैल ,बछड़ा बछड़ी के शरीर से निकला हुआ खून से जो एक दवा बनाई जाती है उसका नाम है dexorange ! बहुत ही popular दवा है और डाक्टर इसको खून की कमी के लिए महिलाओ को लिखते है खासकर जब वो गर्भावस्था मे होती है क्यूंकि तब महिलाओ मे खून की कमी आ जाती है और डाक्टर उनको जानवरो के खून से बनी दवा लिखते है क्यूंकि उनको दवा कंपनियो से बहुत भारी कमीशन मिलता है ! इसके इलावा रक्त का प्रयोग बहुत बड़े पैमाने पर lipstick बनाने मे होता है ! इसके बाद रक्त एक और प्रयोग चाय बनाने मे बहुत सी कंपनिया करती है ! अब चाय तो पोधे से प्राप्त होती है ! और चाय के पोधे का size उतना ही होता है जितना गेहूं के पोधे का होता है ! उसमे पत्तिया होती है उनको तोड़ा जाता है और फिर उसे सुखाते हैं ! तो पत्तियों को सूखाकर पैकेट मे बंद कर बेचा जाता हैं ! और पतितयो को नीचे का जो टूट कर गिरता है जिसे डेंटरल कहते हैं आखिरी हिस्सा !लेकिन ये चाय नहीं है ! चाय तो वो ऊपर की पत्ती है ! तो फिर क्या करते है इसको चाय जैसा बनाया जाता है ! अगर हम उस नीचले हिस्से को सूखा कर पानी मे डाले तो चाय जैसा रंग नहीं आता! तो ये विदेशी कपनिया brookbond, lipton आदि क्या करती है जानवरो के शरीर से निकला हुआ खून को इसमे मिलकर सूखा कर डिब्बे मे बंद कर बेचती है ! तकनीकी भाषा मे इसे tea dust कहते है ! इसके इलवा कुछ कंपनिया nail polish बनाने ने प्रयोग करती है !!
मांस,तेल ,खून ,के बाद क्त्ल्खानों मे पशुओ कि हड्डीया निकलती है ! और इसका प्रयोग toothpaste बनाने वाली कंपनिया करती है colgate, close up, pepsodent, cibaca आदि आदि ! सबसे पहले जानवरो कि हड्डियों को इकठा किया जाता है ! उसे सुखाया जाता है फिर एक मशीन आती है bone crasher ! इसमे इसको डालकर इसका पाउडर बनाया जाता है और कंपनियो को बेचा जाता है ! shaving cream बनाने वाली काफी कंपनिया भी इसका प्रयोग करती हैं ! इस पोस्ट को आप इस ऑडियो में भी सुन सकते है..
और आजकल इन हड्डियों का प्रयोग जो होने लगा है टेल्कम powder बनाने मे ! नहाने के बाद लोग लागाते हैं उसमे इसका प्रयोग होता है ! क्यूंकि ये थोड़ा सस्ता पड़ता है ! वैसे टेल्कम powder पथर से बनता है! और 60 से 70 रुपए किलो मिलता है और गाय की हड्डियों का powder 25 से 30 रुपए मिल जाता है !! इस लिए कंपनिया हड्डियों का प्रयोग करती हैं ! इसके बाद गाय ऊपर की जो चमड़ी है उसका सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है cricket के ball बनाने मे ! लाल रंग की ball होती है आज कल सफ़ेद रंग मे भी आती है ! जो गाय की चमड़ी से बनाई जाती है !गाय के बछड़े की चमड़ी का प्रयोग ज्यादा होता है ball बनाने मे ! दूसरी एक ball होती है foot ball ! cricket ball तो छोटी होती है ! पर foot ball बड़ी होती है इसमे और ज्यादा प्रयोग होता है गाय के चमड़े का !! आजकल और एक उद्योग मे इस चमड़े का बहुत प्रयोग हो रहा है !जूते चप्पल बनाने मे ! अगर आप बाजार से कोई ऐसा जूता चप्पल खरीदते है ! जो चमड़े का है और बहुत ही soft है तो वो 100 % गाय के बछड़े के चमड़े का बना है ! और अगर hard है तो ऊंट और घोड़े के चमड़े का ! इसके इलवा चमड़े के प्रयोग पर्स, बेल्ट जो बांधते है ! इसके इलवा आजकल सजावट के समान ने इन का प्रयोग किया जाता है !! ___________________ तो गाय और गाय जैसे जानवरो आदि का कत्ल होता है ! तो 5 वस्तुए निकलती है !!
1) मांस निकला —— जो मांसाहारी लोग खाते है ! 2) चर्बी का तेल —- जो cosmatic बनाने मे प्रयोग हुआ ! 3) खून निकाला —— जो अँग्रेजी एलोपेथी दवाइया ,चाय बनाने मे ! nailpolish lipstick मे !
4) हडडिया निकली —— इसका प्रयोग toothpaste, tooth powder, shaving cream मे ! और टेलकम powder
5) चमड़ा निकला !—— इसका प्रयोग cricket ball,foot ball जूते, चप्पल, बैग ,belt आदि !
जैसा ऊपर बताया 35000 क्तलखाने है और 4 करोड़ गाय, भैंस, बछड़ा, बकरी, ऊंट आदि काटे जाते है ! तो इनसे जितना मांस उतपन होता है वो बिकता है ! चर्बी का तेल बिकता है ! खून बिकता है हडडिया और चमड़ा बिकता है !! तो निकलने वाली इन पाँच वस्तुओ का भरपूर प्रयोग है और एक बहुत बड़ा बाजार है इस देश मे!! ____________________________________
इसके अतिरिक्त गाय के शरीर के अंदर के कुछ भाग है ! उनका भी बहुत प्रयोग होता है! जैसे गाय मे बड़ी आंत होती है !! जैसे हमारे शरीर मे होती है ! ऐसे गाय के शरीर मे होती है ! तो जब गाय के काटा जाता है ! तो बड़ी आंत अलग से निकली जाती है ! और इसको पीस कर gelatin बनाई जाती है !जिसका बहुत जादा प्रयोग आइसक्रीम, चोकोलेट, कैप्सूल आदि में किया जाता है
इसके इलवा Maggi, Pizza, Burger, Hotdog , Chawmin के base material बनाने मे भरपूर होता है | और एक jelly आती red orange color की उसमे gelatin का बहुत प्रयोग होता है !! आजकल जिलेटिन का उपियोग साबूदाना में होने लगा है | जो हम उपवास मे खाते है ! तो ये सब वस्तुओ जो जानवरो के कत्ल के बाद बनाई जाती है ! और हम जाने अनजाने मे इन का प्रयोग अपने जीवन मे कर रहे है ! और कुछ लोग अपने आप को 100 टका हिन्दू कहते है ! शाकाहारी कहते है !और कहीं न कहीं इस मांस का प्रयोग कर रहे है ! और अपना धर्म भ्रष्ट कर रहे है !
तो आप इन सबसे बचे ! और अपना धर्म भ्रष्ट होने से बचाये ! एक बात हमेशा याद रखे टीवी पर देखाये जाने वाले विज्ञापन (ads) को देख अपने घर मे कोई वस्तु न लाये ! इनमे ही सबसे बड़ा धोखा है ! जैसे चाकलेट का विज्ञापन आता है केडबरी nestle आदि !! coke pepsi का आता है ! fair and lovely आदि क्रीमे ! colgate closeup pepsodent आदि आदि toothpaste !!
तो आप अपने दिमाग से काम ले इन सब चीजों से बचे !! क्यूंकि विज्ञापन उनी वस्तुओ का दिखाया जाता है जिनमे कोई क्वाल्टी नहीं होती !! देशी गाय का घी बिना विज्ञापन के बिकता है नीम का दातुन बिना विज्ञापन के बिकता है गन्ने का रस बिना विज्ञापन के बिकता है!!
विज्ञापन का सिद्धांत है गंजे आदमी को भी कघा बेच दो !! एक ही बात को बार-बार, बार-बार दिखाकर आपका brain wash करना !! ताकि आप सुन सुन कर एक दिन उसे अपने घर मे उठा लाये !!
आपने पूरी post पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !! वन्देमातरम जय गौ माता !
मित्रो क्या आपने कभी विचार नहीं किया ?? कि आखिर जिस Refine तेल से आप अपनी और अपने छोटे बच्चों की मालिश नहीं कर सकते, जिस Refine को आप बालों मे नहीं लगा सकते, आखिर उस हानिकारक Refine तेल को कैसे खा लेते हैं ??
2 मिनट समय देकर Refine तेल की पुरी कहानी जरूर पढ़ें ।
आज से 50 साल पहले तो कोई रिफाइन तेल के बारे में जानता नहीं था, ये पिछले 20 -25 वर्षों से हमारे देश में आया है | कुछ विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियाँ इस धंधे में लगी हुई हैं | इन्होने चक्कर चलाया और टेलीविजन के माध्यम से जम कर प्रचार किया लेकिन लोगों ने माना नहीं इनकी बात को, तब इन्होने डोक्टरों के माध्यम से कहलवाना शुरू किया | डोक्टरों ने अपने प्रेस्क्रिप्सन में रिफाइन तेल लिखना शुरू किया कि तेल खाना तो सफोला का खाना या सनफ्लावर का खाना, ये नहीं कहते कि तेल, सरसों का खाओ या मूंगफली का खाओ, अब क्यों, आप सब समझदार हैं समझ सकते हैं |
विस्तार से जानने के लिये ये विडियो देखे >
ये रिफाइन तेल बनता कैसे हैं ? मैंने देखा है और आप भी कभी देख लें तो बात समझ जायेंगे | किसी भी तेल को रिफाइन करने में 6 से 7 केमिकल का प्रयोग किया जाता है और डबल रिफाइन करने में ये संख्या 12 -13 हो जाती है | ये सब केमिकल मनुष्य के द्वारा बनाये हुए हैं प्रयोगशाला में, भगवान का बनाया हुआ एक भी केमिकल इस्तेमाल नहीं होता, भगवान का बनाया मतलब प्रकृति का दिया हुआ जिसे हम ओरगेनिक कहते हैं | तेल को साफ़ करने के लिए जितने केमिकल इस्तेमाल किये जाते हैं सब Inorganic हैं और Inorganic केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका combination जहर के तरफ ही ले जाता है | इसलिए रिफाइन तेल, डबल रिफाइन तेल गलती से भी न खाएं |
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फिर आप कहेंगे कि, क्या खाएं ? तो आप शुद्ध तेल खाइए, सरसों का, मूंगफली का, तीसी का, या नारियल का | अब आप कहेंगे कि शुद्ध तेल में बास बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल बहुत चिपचिपा होता है | हमलोगों ने जब शुद्ध तेल पर काम किया या एक तरह से कहे कि रिसर्च किया तो हमें पता चला कि तेल का चिपचिपापन उसका सबसे महत्वपूर्ण घटक है | तेल में से जैसे ही चिपचिपापन निकाला जाता है तो पता चला कि ये तो तेल ही नहीं रहा, फिर हमने देखा कि तेल में जो बास आ रही है वो उसका प्रोटीन कंटेंट है, शुद्ध तेल में प्रोटीन बहुत है, दालों में ईश्वर का दिया हुआ प्रोटीन सबसे ज्यादा है, दालों के बाद जो सबसे ज्यादा प्रोटीन है वो तेलों में ही है, तो तेलों में जो बास आप पाते हैं वो उसका Organic content है प्रोटीन के लिए | 4 -5 तरह के प्रोटीन हैं सभी तेलों में, आप जैसे ही तेल की बास निकालेंगे उसका प्रोटीन वाला घटक गायब हो जाता है और चिपचिपापन निकाल दिया तो उसका Fatty Acid गायब | अब ये दोनों ही चीजें निकल गयी तो वो तेल नहीं पानी है, जहर मिला हुआ पानी | और ऐसे रिफाइन तेल के खाने से कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं, घुटने दुखना, कमर दुखना, हड्डियों में दर्द, ये तो छोटी बीमारियाँ हैं, सबसे खतरनाक बीमारी है, हृदयघात (Heart Attack), पैरालिसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना, आदि, आदि | जिन-जिन घरों में पुरे मनोयोग से रिफाइन तेल खाया जाता है उन्ही घरों में ये समस्या आप पाएंगे, अभी तो मैंने देखा है कि जिनके यहाँ रिफाइन तेल इस्तेमाल हो रहा है उन्ही के यहाँ Heart Blockage और Heart Attack की समस्याएं हो रही है |
जब हमने सफोला का तेल लेबोरेटरी में टेस्ट किया, सूरजमुखी का तेल, अलग-अलग ब्रांड का टेस्ट किया तो AIIMS के भी कई डोक्टरों की रूचि इसमें पैदा हुई तो उन्होंने भी इसपर काम किया और उन डोक्टरों ने जो कुछ भी बताया उसको मैं एक लाइन में बताता हूँ क्योंकि वो रिपोर्ट काफी मोटी है और सब का जिक्र करना मुश्किल है, उन्होंने कहा “तेल में से जैसे ही आप चिपचिपापन निकालेंगे, बास को निकालेंगे तो वो तेल ही नहीं रहता, तेल के सारे महत्वपूर्ण घटक निकल जाते हैं और डबल रिफाइन में कुछ भी नहीं रहता, वो छूँछ बच जाता है, और उसी को हम खा रहे हैं तो तेल के माध्यम से जो कुछ पौष्टिकता हमें मिलनी चाहिए वो मिल नहीं रहा है |” आप बोलेंगे कि तेल के माध्यम से हमें क्या मिल रहा ? मैं बता दूँ कि हमको शुद्ध तेल से मिलता है HDL (High Density Lipoprotein), ये तेलों से ही आता है हमारे शरीर में, वैसे तो ये लीवर में बनता है लेकिन शुद्ध तेल खाएं तब | तो आप शुद्ध तेल खाएं तो आपका HDL अच्छा रहेगा और जीवन भर ह्रदय रोगों की सम्भावना से आप दूर रहेंगे |
अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है | मलेशिया नामक एक छोटा सा देश है हमारे पड़ोस में, वहां का एक तेल है जिसे पामोलिन तेल कहा जाता है, हम उसे पाम तेल के नाम से जानते हैं, वो अभी भारत के बाजार में सबसे ज्यादा बिक रहा है, एक-दो टन नहीं, लाखो-करोड़ों टन भारत आ रहा है और अन्य तेलों में मिलावट कर के भारत के बाजार में बेचा जा रहा है | 7 -8 वर्ष पहले भारत में ऐसा कानून था कि पाम तेल किसी दुसरे तेल में मिला के नहीं बेचा जा सकता था लेकिन GATT समझौता और WTO के दबाव में अब कानून ऐसा है कि पाम तेल किसी भी तेल में मिला के बेचा जा सकता है | भारत के बाजार से आप किसी भी नाम का डब्बा बंद तेल ले आइये, रिफाइन तेल और डबल रिफाइन तेल के नाम से जो भी तेल बाजार में मिल रहा है वो पामोलिन तेल है | और जो पाम तेल खायेगा, मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर देने को तैयार हूँ कि वो ह्रदय सम्बन्धी बिमारियों से मरेगा | क्योंकि पाम तेल के बारे में सारी दुनिया के रिसर्च बताते हैं कि पाम तेल में सबसे ज्यादा ट्रांस-फैट है और ट्रांस-फैट वो फैट हैं जो शरीर में कभी dissolve नहीं होते हैं, किसी भी तापमान पर dissolve नहीं होते और ट्रांस फैट जब शरीर में dissolve नहीं होता है तो वो बढ़ता जाता है और तभी हृदयघात होता है, ब्रेन हैमरेज होता है और आदमी पैरालिसिस का शिकार होता है, डाईबिटिज होता है, ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है |