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शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

भारतीय न्यायव्यवास्था (प्राचीन एवं वर्तमान)

विलीयम एडम के सर्वे के अनुसार १८३५-५० तक भारत में स्टील बनाने वाली १०००० फेक्ट्रीयां थी ।  भारत कि उन १०००० स्टील की फेक्ट्रीयांओं से कुल स्टील का उत्पादन ८० से ९० लाख टंन होता था सन १८३५-५० तक और आज भारत में इतने बडे - बडे स्टील पलान्ट, इतनी मशीनें , इतने विदेशी कम्पनियां और इतने सारे स्टील के फेक्ट्रीयां परन्तू कुल उत्पादन ७० से ७५ लाख टंन प्रति वर्ष था । उनमे जो स्टील बन रहा था उसकी गुणवता (कूवालीटी ) क्या थी ?  उस पर वर्षो -वर्ष जंग नहीं लगता था इतना बडीयां गुण्वत्ता का स्टील भारत में बनता रहा १८३५-५० तक । जिसका जीवांत उदाहरण हैं मेहरोली में लोहे का अशोक स्तम्भ । और आज का स्टील यदि वर्षा के पानी में छोड दें तो ३ महीने में ही लोहे पर जंग लग जायेंगा । और यह स्टील कि सबसे अधिक फेक्ट्रीयां सर्गूजा मध्य प्रदेश मे है क्यों की दूनियां का सबसे अच्छा आईरन ऑर सबसे अधिक मात्रा में भारत के सर्गूजा में पाया जाता हैं, और जो इस तकनिक को जानते है उन्हे हम आदिवासी कहते हैं उन के पास कोई डीग्री नहीं है परन्तू वह सबसे अच्छा स्टील बनाने की कला जानते हैं परन्तू हम मनते हैं कि जिसके पास कोई डीग्री नहीं हैं वो अशिक्षीत हैं ,मुर्ख हैं । जबकी उनके पास सबसे उत्तम तकनीक हैं जो आज धीरे -धीरे   लूप्त होती जा रही है हमरी गलती के कारण । अंग्रेजों ने इस कला को बर्बाद करने के लिये भी एक कानून ( ईण्डीयन फोरेस्ट एक्ट)  बनाया था जिसके अनूसार स्थानीयें आदीवासीओं को लोहे से अच्छी स्टील बनाना जानते थे उन्हे खादानो से कंचा माल नही लेने देते थे । यदि वह खदानों से कचा माल लें तो उनको ४० कोडे मारे जाते थे और उस पर भी यदि वह व्यक्ति नहीं मरे तो उसको गोली मार दी जाती थी इसना सख्त कानून बना दिया ।  तो बीना कचां माल के वह लोग भूखे मरने लगे । और उन्हीं  खदानों से अंग्रेज लोहा खोद - खोद कर ले जाते थे । और स्टील की विभिन्न वस्तूएं बनाकर हमरे बाजारो में बेचा करते थे । आज भी वोही कानून( ईण्डीयन फोरेस्ट एक्ट) चल रहा है भारत के मूल निवासी (आदिवासी) लोहा नही ले जा सकते । जबकी जापान कि काम्पनी निपन्डेरनू  (एसी ही और भी विदेशी कम्पनियां) । आज भी कचा माल कोडीयों केदाम खोद - खोद कर ले जा रही है और स्टील बनाकर हमे ही उंच्चे दामॉ पर बेच रही हैं ।  आज भी सर्गुजा मे कुछ आदिवासी लोग हैं जो उस तकनीक को जानते है परन्तू उनको आज भी उसी कानून के कारण स्टील नही लेने दिया जाता । तो हम कैसे अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारे जब हमे ही हमारा कचां माल नही लेने दिया जाता और विदेशी कम्पनियों को कोडीयों के दाम पर कचां माल खोद-खोद करे लें जा रही हैं । और क्यों कोई राजनितिक पार्टी , भारत देश के लोग इस पर विचार नही मरते । क्यों नहीं इस कानून को रद्द किया जाता हैं । कैसे में मानू के यह देश आजाद हो गया ?

भारत में बहुत अच्छा कपडा बनाने वाले बडीयां कारीगर होते था वो कपडा इतना बारीक बुनाई करते थे की कोई मशीन भी नहीं कर सकती । उस कपडे के थान के थान एक छोटी सी अंगूठी में से निकल जाते थे । पूरी दुनियां मे प्रसिध्द था भारत का कपडा १८३५-५० तक । भारत मे उस समय तक दो ही वस्तूएं सबसे जादा निर्यात होती थी कपडा और मसाले । अंग्रेजो का कपडा लंका शयर और मान्चेस्ट्र का कपडा बिक नही पाता था क्योंकी भारत का ही कपडा इतना बडीयां होता था । तो फ्री ट्रेड के नाम पर अंग्रेजों ने उन सब करीगरों के अंगूठें और हाथ कटवा दियें  । सुरत में १००००० बहतरीन कारीगरों के अंगूठें और हाथ कटवा दियें । बिहार मे एक इलाका हैं मधूबनी । मधूबनी मे २५०००० से ३००००० कारीगरों के हाथ कटवा दियें अंग्रेजों ने । इस पर अंग्रेज बडा गर्व करते है, कयोकी भारत का सबसे बडा उद्योग हैं कपडा मील्ले और कारीगर नही रहेंगे तो कपडा मील्ले नही चल सकती और जब कपडा मील्ले धराशाही होगी तो भारत की अर्थव्यवस्था भी धराशाही हो जाएगी । यह एक वार्ता हैं ब्रिटीश की संसाद मे चल रही हैं । और उसके बाद अंग्रेजों ने यह कर दिया हैं  ताकी अंग्रेजो का माल (लंका शयर और मान्चेस्ट्र का कपडा ) भारत मे बिक पायें । और अंग्रेजों ने अपने कपडों पर से सारे टेक्स हटा लियें और भारत की कपडा मील्लों पर अतीरीक्त टेक्स लगाया । सुरत की कपडा मील्लों पर १०००% अतीरिक्त टेक्स लगा दिया । 
ताकी यह उद्योग बन्द हो जायें । और लंका शयर और मान्चेस्ट्र का कपडा  बिकने लगे ।
अब कपडा बनाने के लियें कच्चा माल अंग्रेजों को चाहीयें तो भारत का कोटन ब्रिटेन मे जाने लगा । तो अंग्रेजों को बडा परीशाम करना पडता था तो अंग्रेजों ने जहां - जहा पर अच्छे कोटन (कच्चा माल) मिलता था वहां - वहां पर अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के लियें रेलगाडी चलाई इस देश में । आपको लगता होगा कि अंग्रेज नही आते तो रेलगाडी नही होती इस देश में परन्तू आप यह नही जानते की अंग्रेजो ने रेल इस लियें चलाई ताकी अंग्रेजे भारत के गांव - गांव से कोटन को ईकाठा करके मुम्बाई ले जा सके और मुम्बाई के बन्द्रगाह से जहाजॐ के द्वारा कोटन को ब्रिटेन ले जा सके । और बाद में इसी रेल  का एक और प्रयोग होने लगा । अंदोलन को कुचलने के लियें जल्दी से जल्दी भारत के विभिन्न क्षेत्रो मे सेना को पहुंचाने के लिए रेल का प्रयोग भी किया जाने लगा ।  अंग्रेजों के सबसे पहले रेल जो चलाई है मुम्बाई से थाना के बीच में ट्राईल के रुप में । जब बाद मे प्रयोग सफल हो गया तो सबसे पहले अंग्रेजों ने रेल चलाई है मुम्बाई से अहमदाबाद मे बीच में जो कपास के लिये सबसे अच्छा उत्पादान करते हैं ।  अब अंग्रेजों के कपास को ईकाठा कर के मुम्बाई के बंद्र्गाह से कपास के जहाज तो भर कर भेजना शुरु कर दियें परन्तू इंग्लेंड से खाली जहाज आते थे तो खाली जहाज समून्द्र में डुब जाते थे । तो इसके लियें उन्हो ने समून्द्री जहाजों में नमक भर कर भेजना शुरु कर दिया । समून्द्री जहाजों में नमक भर कर ईंग्लेंड से आते थे और मुम्बाई के बन्द्रगाह पर नमक डाल देते थे । और यहां से कपास भर कर ले जाते थे । भारत में उस समय तक सभी लोग स्वादेशी नमक ही खाते थे । परन्तू अग्रेजों ने स्वदेशी नमक पर भी टेक्स लगा दियें और अपना नमक टेक्स फ्री बेचने लगें ताकी सभी उनका नमक खाएं । इस पर महात्मा गांधी जी ने डांडी सत्यग्रह किया । ६ अप्रेल १९३० में महात्मा गांघी जी ने एक मूठ्ठी हाथ मे लेकर कसम खाई थी के भारत में विदेशी नमक नहीं बिकने दूंगा । और आज भारत में कितने ही विदेशी नमक बिक रहे हैं पत्ता नहीं गांघी जी कि आत्मा को कितना दुःख होता होगा यह देख कर । हमारी सरकारो ने विदेशी कम्पनियों को नमक बनाने के लियें भी अनूमती दे दी । जरा आप बातायें कि नमक बनाने मे कॉन सी हाईटेक तकनीक हैं । समून्द्र का पानी एक जगह ईकाठा कर लेते हैं और धूप में  पानी भाप बन कर ऊड जाता हैं और नमक नीचे रह जाता हैं क्या भारत के लोग इतना भी नहीं कर सकते हैं । कि विदेशी कम्पनियाओं को नमक बनाने के लिये अनूमती दे दी । गांधीजी कि आत्मा कितने आंसू बाहाती होगी यह देख कर कि जिस देश मे मेने नमक सत्यग्रह किया वहां पर आजादी के बाद भी आज तक विदेशी नमक बिक रहा हैं जरा सोचीयें कि यह कितना बडा नेशनल क्राईम हैं । अंग्रेजों ने जो - जो व्यवस्थायें बनाई सभी इस देश मे आज भी चल रही हैं । तो मैं यह कैसे मानू की यह देश आजाद हो चूका हैं ।

अंग्रेजों ने १८६५ में एक कानून बना दिया । उसका नाम था " ईण्डीयां फोरेस्ट एक्द " । अंग्रेजों ने यह कानून क्यों बनाया था ? भारत मे जंगल जो होते थे । वो ग्रामसभा कि सम्पति होते थे । तो गांव के लोग उन जंगलों कि देखभाल करते थें तो गांव के लोग जो मानते थे कि वो उनकी सम्पति थी । तो जंगलो को सुरक्षीत रखने के लियें  गांव वालों ने पचासो तरीके अपनायें । और अंग्रेज जब पेड कटने आते थे तो गांव / आदिवासी लोगो का उनसे झगडा होता था तो अंग्रेजो ने एक कानून बना कर एक ही झटके मे उन सारी सम्पतियों को गांव से लेकर सरकार के पास हाथों मे दे दी । भारत मे आज भी एक जाति है राजस्थान में जिसका नाम है "विष्नोई" । में उस गांव मे गया हू और यह विष्नोई जाति के लोग जंगलो को बचाने के लियें आपनी जान भी देते थे । सन १८६५ में अंग्रेजों ने इस जाति के हजारो लोगों का कत्ल किया इस कानून कि मद्द से । पहले उन लोगो का गला कटता था उसके बाद पेड कटता था । इस प्रकार हाजारों लोगों ने पेडो को बचाने के लिए अपनी कूर्बानीयां दी । और आप को यह सुन कर अश्चरीये होगा कि वो ईण्डीयां फोरेस्ट एक्ट आज भी इस देश में वैसे का वैसा ही चल रहा हैं । जिन आदिवासीयों ने जंगल लगाएं हजारो वर्षो मे उन को ही कोई हक नहीं और जो जंगल कैसे लगाए जाते है नही पत्ता जिनको जंग्लों से कोई लगाव नहीं उनको जंगलों का मालीक बना दिया इस इण्डीयां फोरेस्ट एक्ट ने कानून के अनूसार । अंग्रेजों को जब किसी को मारना पीटना हो या बर्बाद करना हो तो अंग्रेज एक कानून बना देते थे । और कहते थे कि हम तो कानून का पालन कर रहे है अब आपकी जेब कट रही हैं तो हम क्या करें हम तो कानून का पालन कर रहें है । इसी कानून के कारण अंग्रेजों ने हजारों आदिवासीयों की हत्या की । और इसी कानून के अनूसार कोई भी भारतीयें जंगलों से पेड नहीं काट सकता चाहे तो अपने घर मे रोटी बनाने के लिए ही क्यों ना हो । और अंग्रेजो और उनके ठेके दारों को हजारों पेड एक ही दिन मे काट दे इसका लाईसेंस दे दिया । आज भी इस कानून का एक प्रोवीजान वैसे का वैसा ही है कि भारतीयें पेड नहीं काट सकते हैं  यदि कोई पेड आप के कम्पाऊंड में हैं और वो पेड आपकी दिवार गिरा सकता हैं तो भी आप उस पेड को काट नहीं सकते हैं यदि पेड काटा तो और किसी ने शिकायत कि तो आप के विरुध्द कोर्ट कैस हो गया । दुसरी और विदेशी कम्पनियों को लाइसेंस दिया जैसे ई.टी.सी. जो सिग्रेट बनाने के लियें एक वर्ष मे १४००,००,००,००,००० पेड काट देती हैं  और आपने एक पेड काट दिया तो आपको जेल हो जाएगी । 

अंग्रेजों ने १८९४ में एक कानून बनाया "लैण्ड अएकूजेशन एक्ट" मटलब जमीन हडपने का कानून । अंग्रेजों को जमीन हडपने में परेशानी होती थी कयोंकी लोग इसका विरोध करते थे तो अंग्रेजों ने एक कानून बना दिया "लैण्ड अएकूजेशन एक्ट"  इस कानून के अनूसार अंग्रेज भारतीयों से उनकी जमीने हडप कर अंग्रेजी कम्पनियों को देते थे । बडी बडी रियास्ते हडप लेते थे जैसे झांसी कि रानी कि जमीन अंग्रेजो ने हडप ली थी । गांव के गांव हडप लिया करते थे और इस काम को करने के लियें एक अंग्रेज अफ्सर डल्होजी ने सबसे अधीक कतल करें गांव के गाव खत्म कर डालटे थे । डल्होजी के कहा कि हमे जमीन हडपने के लिए की बहूत हिन्सा करनी पडती थी तो क्यों ना हम कोई कानून बना दे, तो अंग्रेजों ने एक कानून बनाया था "लैण्ड अएकूजेशन एक्ट" । जो आज भी वैसे का कैसा ही चल रहा है आज भी जमीन किसानों से छीन कर विदेशी कम्पनियों को कोडीयों के दाम पर देते है  विकास के नाम पर । पहले भी हमारी जमीन हडप कर विदेशो को अंग्रेज देते थे और आज भी वही हो रहा है तो मैं कैसे यह मानू की यह देश आजाद हो गया हैं ? 

अंग्रेजों ने १८६० में एक कानून बनाया "ईण्डीयां पुलीस एक्ट "  और यह कानून अंग्रेजों ने इसलियें बनाया क्योंकी आप जानते होंगें कि १८५७ के विध्द्रोह को मंगल पांडे ने अंग्रेजी अफ्सर को गोळी मार दी थी क्योंकी वह जान गाया था कि जो कार्तूस उसे मूंह से खोलना पडता था उसमें गाय कि चर्भी इस्तमाल होती था उसका धर्म भ्रष्टकर दिया था तो उसने उस अंग्रेजी अफ्सर कि जान लेली जो उसे गोली चालने के लियें कहता था । और अंग्रेजों ने उसे फांसी पर चडा दिया । यह बात आग कि तरहा भारत मे फेल गाई और जगहा - जगहा पर भारतीयें लोगो व्दारा जो अंग्रेजों के लियें काम करते थे । विरोध होने लागा और उस विरोध को दबाने के लियें अंग्रेजों ने एक कानून बनाया "ईण्डीयां पुलीस एक्ट " इस के अनूसार पुलीस को हाक था कि वोह भारतीयों पर डंडा मार सकते हैं परन्तू भारतीयों को उसका विरोध करने का हक नही था । मतलाब यदि कोई पुलीस वाला आप को मार रहा है तो उसको आप को मारने का हक हैं परन्तू आप उसका डंडा भी नही पकड सकते नही तो आप पर केस होगा की आपने पुलीस वाले को उसकी डूटी करने से रोका रहें है। इस कानून के बाद तो भारत वासीयों पर जो पुलीस का डंडा बर्सा तो सारी कि सारी हदे ही पार कर दी । जगहा - जगहा पर भारत मे लाखों लोगो को डंडे से मार- मार कर जान से मार दिया ।  मरने वाले को राईट तो डीफेंस नही हैं पूलीस वाले को पीटने का राईट हैं इसी कानून के अधार पर १३ अप्रेल १९३० को जलियां वाला कांड हूआ था इस देश में जनरल डयर ने २० हजार लोगों जो शांति से सभा कर रहे थें पर बिना चेतावनी दियें गोलीयां चलाने का आदेश दे दिया था । और जब उस पर कोर्ट केस हुआ तो उस ने कहां कि मेरे पास गोलीयां समाप्त हो गई थी नहीं तो और आधा घंटा गोलीयां चलाता । और जज ने भी उसे बाईजत बरी किया था १८६० के उस कानून के आधार पर कि अंग्रेज पुलीस वालों को राईट टू ओफेंस हैं पर हमे राईट टू डीफेंस नहीं हैं । जो कानून अंग्रेजों ने बनायां था १८६० में वो कानून आज भी चल रहा हैं इस देश में ।

भारत में अंग्रेजों द्वारा इस प्रकार के ३४,७३५ कानून बनाए इस देश को बर्बाद करने के लियें जो आज भी चल रहें हैं ।  तो मैं कैसे यह मानू की यह देश आजाद हो गया हैं ?

सत्ता के हस्तांतरण की संधि

"Transfer of Power Agreement" को जाने और दुसरो को बताएं ।

14 अगस्त 1947 कि रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था इसको को अधिक से अधिक शेयर करें .....

सत्ता के हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है | और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ? आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है | यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे | ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है "One of the self-governing nations in the British Commonwealth" और दूसरा "Dominance or power through legal authority "| Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी |

उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called Freedom) आ रही है ये मै नहीं लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे नोआखाली में थे | माने भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ?

इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई .... ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में Commonwealth Game हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त 1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और Commonwealth Nations में हमारी एंट्री जो है वो एक Dominion State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो ब्रिटेन की महारानी का था और उसके नीचे भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ....... हमारे यहाँ के अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं - (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है |

भारत का नाम INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है "India that is Bharat " जब क़ि होना ये चाहिए था "Bharat that was India " लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है |

भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | और वन्देमातरम को ले के मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो अंग्रेजों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर |

इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे |

इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) |
आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे "व्हीलर बुक स्टोर" वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है |
इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ "I" का मतलब Irish है वही भारत के IPC में "I" का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए |
इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड, कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है |

हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है | हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही 70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी
के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है |

इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है |

इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था ""I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation" |
गुरुकुल का मतलब हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो की हमारी मुर्खता है अगर आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब Higher Learning Institute हुआ करते थे |
इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा |
भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा, हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है |
अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और UNO में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं |
आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है |
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में |

अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है |
हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है ।
आधिक जनकरी के लिये ओर पढें "Transfer of Power Agreement"

शनिवार, 30 जुलाई 2016

गौ हत्या पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया एतिहासिक निर्णय !

गाय काटने से कितना लाभ ?? और गाय बचाने से कितना ??
तो सुप्रीम कोर्ट के मुक़द्दमे मे कसाईयो द्वारा गाय काटने के लिए वही सारे कुतर्क रखे गए जो कभी शरद पवार द्वारा बोले गए या इस देश के ज्यादा पढ़ें लिखे लोगो द्वारा बोले जाते है या देश के पहले प्रधान मंत्री नेहरू द्वारा कहे गए !
कसाईयो का पहला कुतर्क !!
1) गाय जब बूढ़ी हो जाती है तो बचाने मे कोई लाभ नहीं उसे कत्ल करके बेचना ही बढ़िया है ! और हम भारत की अर्थ व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं क्यूंकि गाय का मांस export कर रहे हैं !!
दूसरा कुतर्क !
2) भारत मे गाय के चारे की कमी है ! भूखी मरे इससे अच्छा ये है हम उसका कत्ल करके बेचें !
तीसरा कुतर्क
3) भारत मे लोगो को रहने के लिए जमीन नहीं है गाय को कहाँ रखें ?
चौथा कुतर्क
4 ) इससे विदेशी मुद्रा मिलती है !
और सबसे खतरनाक कुतर्क जो कसाइयों की तरफ से दिया गया कि गाय की ह्त्या करना हमारे धर्म इस्लाम मे लिखा हुआ है की हम गायों की ह्त्या करें !! (this is our religious right ) !
कसाई लोग कौन है आप जानते है ??मुसलमानो मे एक कुरेशी समाज है जो सबसे ज्यादा जानवरों की ह्त्या करता है ! उनकी तरफ से ये कुतर्क आयें !
राजीव भाई की तरफ से बिना क्रोध प्रकट किए बहुत ही धैर्य से इन सब कुतर्को का तर्कपूर्वक जवाब दिया !
उनका पहला कुतर्क गाय का मांस बेचते हैं तो आमदनी होती है देशो को ! तो राजीव भाई ने सारे आंकड़े सुप्रीम कोर्ट मे रखे कि एक गाय को जब काट देते हैं तो उसके शरीर मे से कितना मांस निकलता है ??? कितना खून निकलता है ?? कितनी हड्डियाँ निकलती हैं ??
एक स्वस्थ गाय का वजन 3 से साढ़े तीन क्वींटल होता है उसे जब काटे तो उसमे से मात्र 70 किलो मांस निकलता है एक किलो गाय का मांस जब भारत से export होता है तो उसकी कीमत है लगभग 50 रुपए ! तो 70 किलो का 50 से गुना को ! 70 x 50 = 3500 रुपए !
खून जो निकलता है वो लगभग 25 लीटर होता है ! जिससे कुल कमाई 1500 से 2000 रुपए होती है !
फिर हड्डियाँ निकलती है वो भी 30-35 किलो हैं ! जो 1000 -1200 के लगभग बिक जाती है !!
तो कुल मिलकर एक गाय का जब कत्ल करे और मांस ,हड्डियाँ खून समेत बेचें तो सरकार को या कत्ल करने वाले कसाई को 7000 रुपए से ज्यादा नहीं मिलता !!
आप इस पोस्ट को विडियो में भी देख सकते है >>>



फिर राजीव भाई द्वारा कोर्ट के सामने उल्टी बात रखी गई यही गाय को कत्ल न करे तो क्या मिलता है ??? हमने कत्ल किया तो 7000 मिलेगा और अगर इसको जिंदा रखे तो कितना मिलेगा ??
तो उसका calculation ये है !!
एक स्वस्थ गाय एक दिन मे 10 किलो गोबर देती है और ढाई से 3 लीटर मूत्र देती है ! गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो fertilizer (खाद ) बनती है !जिसे organic खाद कहते हैं तो कोर्ट के जज ने कहा how it is possible ??
राजीव भाई द्वारा कहा गया आप हमे समय दीजिये और स्थान दीजिये हम आपको यही सिद्ध करके बताते हैं ! तो कोर्ट ने आज्ञा दी तो राजीव भाई ने उनको पूरा करके दिखाया !! और कोर्ट से कहा की आई. आर. सी. के वैज्ञानिक को बुला लो और टेस्ट करा लो !!! तो गाय का गोबर कोर्ट ने भेजा टेस्ट करने के लिए ! तो वैज्ञानिको ने कहा की इसमें 18 micronutrients (पोषक तत्व )है !जो सभी खेत की मिट्टी को चाहिए जैसे मैगनीज है ! फोस्फोरस है ! पोटाशियम है, कैल्शियम,आयरन,कोबाल्ट, सिलिकोन ,आदि आदि | रासायनिक खाद मे मुश्किल से तीन होते हैं ! तो गाय का खाद रासायनिक खाद से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है !तो कोर्ट ने माना !!
राजीव भाई ने कहा अगर आपके र्पोटोकोल के खिलाफ न जाता हो तो आप चलिये हमारे साथ और देखे कहाँ – कहाँ हम 1 किलो गोबर से 33 किलो खाद बना रहे हैं राजीव भाई ने कहा मेरे अपने गाँव मे मैं बनाता हूँ ! मेरे माता पिता दोनों किसान है पिछले 15 साल से हम गाय के गोबर से ही खेती करते हैं !
तो 1 किलो गोबर है तो 33 किलो खाद बनता है ! और 1 किलो खाद का जो अंराष्ट्रीय बाजार मे भाव है वो 6 रुपए है !तो रोज 10 किलो गोबर से 330 किलो खाद बनेगी ! जिसे 6 रुपए किलो के हिसाब से बेचें तो 1800 से 2000 रुपए रोज का गाय के गोबर से मिलता है !
और गाय के गोबर देने मे कोई sunday नहीं होता weekly off नहीं होता ! हर दिन मिलता है ! तो साल मे कितना ??? 1800 का 365 मे गुना कर लो !
1800 x 365 = 657000 रुपए !साल का !
और गाय की समानय उम्र 20 साल है और वो जीवन के अंतिम दिन तक गोबर देती है !
तो 1800 गुना 365 गुना 20 कर लो आप !! 1 करोड़ से ऊपर तो मिल जाएगा केवल गोबर से !
और हजारो लाखों वर्ष पहले हमारे शास्त्रो मे लिखा है की गाय के गोबर मे लक्ष्मी जी का वास है !!
और मेकोले के मानस पुत्र जो आधुनिक शिक्षा से पढ़ कर निकले हैं जिनहे अपना धर्म ,संस्कृति – सभ्यता सब पाखंड ही लगता है !हमेशा इस बात का मज़ाक उड़ाते है ! कि हाहाहाःहाहा गाय के गोबर मे लक्ष्मी !
तो ये उन सबके मुंह पर तमाचा है ! क्यूंकि ये बात आज सिद्ध होती है की गाय के गोबर से खेती कर ,अनाज उत्पादन कर धन कमाया जा सकता है और पूरे भारत का पेट भरा जा सकता है !
अब बात करते हैं मूत्र की रोज का 2 – सवा दो लीटर !! और इससे औषधियाँ बनती है
diabetes ,की औषधि बनती है !
arthritis,की औषधि बनती है
bronkitis, bronchial asthma, tuberculosis, osteomyelitis ऐसे करके 48 रोगो की औषधियाँ बनती है !! और गाय के एक लीटर मूत्र का बाजार मे दवा के रूप मे कीमत 500 रुपए है ! वो भी भारत के बाजार मे ! अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे तो इससे भी ज्यादा है !! आपको मालूम है ?? अमेरिका मे गौ मूत्र patent हैं ! और अमेरिका सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र import करती है और उससे कैंसर की medicine बनाते हैं !! diabetes की दवा बनाते हैं ! और अमेरिका मे गौ मूत्र पर एक दो नहीं तीन patent है ! अमेरिकन market के हिसाब से calculate करे तो 1200 से 1300 रुपए लीटर बैठता है एक लीटर मूत्र ! तो गाय के मूत्र से लगभग रोज की 3000 की आमदनी !!!
और एक साल का 3000 x 365 =1095000
और 20 साल का 300 x 365 x 20 = 21900000 !
इतना तो गाय के गोबर और मूत्र से हो गया !! एक साल का !
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और इसी गाय के गोबर से एक गैस निकलती है जिसे मैथेन कहते हैं और मैथेन वही गैस है जिससे आप अपने रसोई घर का सिलेंडर चला सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गाड़ी भी चला सकते हैं 4 पहियो वाली गाड़ी भी !!
जैसे LPG गैस से गाड़ी चलती है वैसे मैथेन गैस से भी गाड़ी चलती है !तो न्यायधीश को विश्वास नहीं हुआ ! तो राजीव भाई ने कहा आप अगर आज्ञा दो तो आपकी कार मे मेथेन गैस का सिलेंडर लगवा देते हैं !! आप चला के देख लो ! उन्होने आज्ञा दी और राजीव भाई ने लगवा दिया ! और जज साहब ने 3 महीने गाड़ी चलाई ! और उन्होने कहा its excellent ! क्यूंकि खर्चा आता है मात्र 50 से 60 पैसे किलोमीटर और डीजल से आता है 4 रुपए किलो मीटर ! मेथेन गैस से गाड़ी चले तो धुआँ बिलकुल नहीं निकलता ! डीजल गैस से चले तो धुआँ ही धुआँ !! मेथेन से चलने वाली गाड़ी मे शोर बिलकुल नहीं होता ! और डीजल से चले तो इतना शोर होता है कान फट जाएँ !! तो ये सब जज साहब की समझ मे आया !!
तो फिर हमने कहा रोज का 10 किलो गोबर एकठ्ठा करे तो एक साल मे कितनी मेथेन गैस मिलती है ?? और 20 साल मे कितनी मिलेगी और भारत मे 17 करोड़ गाय है सबका गोबर एक साथ इकठ्ठा करे और उसका ही इस्तेमाल करे तो 1 लाख 32 हजार करोड़ की बचत इस देश को होती है ! बिना डीजल ,बिना पट्रोल के हम पूरा ट्रांसपोटेशन इससे चला सकते हैं ! अरब देशो से भीख मांगने की जरूरत नहीं और पट्रोल डीजल के लिए अमेरिका से डालर खरीदने की जरूरत नहीं !!अपना रुपया भी मजबूत !
तो इतने सारे calculation जब राजीव भाई ने बंब्बाड कर दी सुप्रीम कोर्ट पर तो जज ने मान लिया गाय की ह्त्या करने से ज्यादा उसको बचाना आर्थिक रूप से लाभकारी है !
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जब कोर्ट की opinion आई तो ये मुस्लिम कसाई लोग भड़क गए उनको लगा कि अब केस उनके हाथ से गया क्यूंकि उन्होने कहा था कि गाय का कत्ल करो तो 7000 हजार कि इन्कम ! और इधर राजीव भाई ने सिद्ध कर दिया कत्ल ना करो तो लाखो करोड़ो की इन्कम !!और फिर उन्होने ने अपना trump card खेला !! उन्होने कहा की गाय का कत्ल करना हमारा धार्मिक अधिकार है (this is our religious right )
तो राजीव भाई ने कोर्ट मे कहा अगर ये इनका धार्मिक अधिकार है तो इतिहास मे पता करो कि किस – किस मुस्लिम राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का प्रयोग किया ?? तो कोर्ट ने कहा ठीक है एक कमीशन बैठाओ हिस्टोरीयन को बुलाओ और जीतने मुस्लिम राजा भारत मे हुए सबकी history निकालो दस्तावेज़ निकालो !और किस किस राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का पालन किया ?
तो पुराने दस्तावेज़ जब निकाले गए तो उससे पता चला कि भारत मे जितने भी मुस्लिम राजा हुए एक ने भी गाय का कत्ल नहीं किया ! इसके उल्टा कुछ राजाओ ने गायों के कत्ल के खिलाफ कानून बनाए ! उनमे से एक का नाम था बाबर ! बाबर ने अपनी पुस्तक बाबर नामा मे लिखवाया है कि मेरे मरने के बाद भी गाय के कत्ल का कानून जारी रहना चाहिए ! तो उसके पुत्र हुमायु ने भी उसका पालन किया और उसके बाद जितने मुगल राजा हुए सबने इस कानून का पालन किया including औरंगजेब !!
फिर दक्षिण भारत मे एक राजा था हेदर आली !टीपू सुल्तान का बाप !! उनसे एक कानून बनवाया था कि अगर कोई गाय की ह्त्या करेगा तो हैदर उसकी गर्दन काट देगा और हैदर अली ने ऐसे सैकड़ो कसाईयिओ की गर्दन काटी थी जिन्होने गाय को काटा था फिर हैदर अली का बेटा आया टीपू सुलतान तो उसने इस कानून को थोड़ा हल्का कर दिया तो उसने कानून बना दिया की हाथ काट देना ! तो टीपू सुलतान के समय में कोई भी अगर गाय काटता था तो उसका हाथ काट दिया जाता था |
तो ये जब दस्तावेज़ जब कोर्ट के सामने आए तो राजीव भाई ने जज साहब से कहा कि आप जरा बताइये अगर इस्लाम मे गाय को कत्ल करना धार्मिक अधिकार होता तो बाबर तो कट्टर ईस्लामी था 5 वक्त की नमाज पढ़ता था हमायु भी था औरंगजेब तो सबसे ज्यादा कट्टर था ! तो इनहोने क्यूँ नहीं गाय का कत्ल करवाया और क्यूँ ? गाय का कत्ल रोकने के लिए कानून बनवाए ??? क्यूँ हैदर अली ने कहा कि वो गाय का कत्ल करने वाले के हाथ काट देगा ??
तो राजीव भाई ने कोर्ट से कहा कि आप हमे आज्ञा दें तो हम ये कुरान शरीफ ,हदीस,आदि जितनी भी पुस्तके है हम ये कोर्ट मे पेश करते हैं और कहाँ लिखा है गाय का कत्ल करो ये जानना चाहतें है ! और आपको पता चलेगा कि इस्लाम की कोई भी धार्मिक पुस्तक मे नहीं लिखा है की गाय का कत्ल करो !
हदीस मे तो लिखा हुआ है कि गाय की रक्षा करो क्यूंकि वो तुम्हारी रक्षा करती है ! पैगंबर मुहमद साहब का statement है की गाय अमोल जानवर है इसलिए उस पर दया करो ! और एक जगह लिखा है गाय का कत्ल करोगे तो दोजत मे भी जमीन नहीं मिलेगी !मतलब जहनुम मे भी जमीन नहीं मिलेगी !!
तो राजीव भाई ने कोर्ट से कहा अगर कुरान ये कहती है मुहम्मद साहब ये कहते हैं हदीस ये कहती है तो फिर ये गाय का कत्ल कर धार्मिक अधिकार कब से हुआ ?? पूछो इन कसाईयो से ?? तो कसाई बोखला गए ! और राजीव भाई ने कहा अगर मक्का मदीना मे भी कोई किताब हो तो ले आओ उठा के !!
अंत कोर्ट ने उनको 1 महीने का पर्मिशन दिया की जाओ और दस्तावेज़ ढूंढ के लाओ जिसमे लिखा हो गाय का कत्ल करना इस्लाम का मूल अधिकार है ! हम मान लेंगे !! और एक महीने तक भी कोई दस्तावेज़ नहीं मिला !! कोर्ट ने कहा अब हम ज्यादा समय नहीं दे सकते ! और अंत 26 अक्तूबर 2005 judgement आ गया !! और आप चाहें तो judgement की copy पोस्ट के अंत में से डाउनलोड कर सकते है
ये 66 पन्ने का judgement है सुप्रीम कोर्ट ने एक इतिहास बना दिया और उन्होंने कहा की गाय को काटना सांविधानिक पाप है धार्मिक पाप है ! और सुप्रीम कोर्ट ने कहा गौ रक्षा करना,सर्वंधन करना देश के प्रत्येक नागरिक का सांविधानिक कर्त्तव्य है ! सरकार का तो है ही नागरिकों का भी सांविधानिक कर्तव्य है ! अब तक जो संविधानिक कर्तव्य थे जैसे , संविधान का पालन करना ,राष्ट्रीय ध्वज ,का सम्मान करना ,क्रांतिकारियों का सम्मान करना ,देश की एकता , अखंडता को बनाए रखना ! आदि आदि अब इसमे गौ की रक्षा करना भी जुड़ गया है !!
सुप्रीम कोर्ट ने कहा की भारत की 34 राज्यों की सरकार की जिमेदारी है की वो गाय का कतल आपने आपने राज्य में बंद कराये और किसी राज्य में गाय का कतल होता है तो उस राज्य के मुख्यमंत्री की जिमेदारी है राज्यपाल की जावबदारी,चीफ सेकेट्री की जिमेदारी है, वो अपना काम पूरा नहीं कर रहे है तो ये राज्यों के लिए सविधानिक जवाबदारी है और नागरिको के लिए सविधानिक कर्त्तव्य है !!
अब कानून दो शर्त पर बनाये जाते हैं एक जो केद्र सरकार बना सकती है और एक 35 राज्यों की राज्य सरकार बना सकती है अपने अपने राज्यों में !! अगर केंद्र सरकार ही बना दे !! तो किसी राज्य सरकार को बनाने की जरूरत नहीं ! केंद्र सरकार का कानून पूरे देश मे लागू होगा ! तो आप सब केंद्र सरकार पर दबाव बनाये !! जब तक केंद्र सरकार नहीं बनाती तब तक आप अपने अपने राज्य की सरकारों पर दबाव बनाये ! दबाव कैसे बनाना है ???
आपको हजारो ,लाखो की संख्या मे प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति या राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखना है और इतना ही कहना है की 26 अक्तूबर 2005 को जो सुप्रीम कोर्ट का judgment आया है उसे लागू करो !!
आप अपने -आस पड़ोस ,गली गाँव ,मुहल्ला ,शहर मे लोगो से बात करनी शुरू करे उनको गाय का महत्व समझाये !! देश के लिए गाय का आर्थिक योगदान बताएं ! और प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति या राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का निवेदन करें !
और अंत उस क्रांतिकारी मंगल पांडे ने इतिहास बना वो फांसी पर चढ़ गया लेकिन गाय की चर्बी के कारतूस उसने अपने मुंह से नहीं खोले ! और जिस अंग्रेज़ अधिकारी ने उसको मजबूर किया उसको मंगल पांडे ने गोली मर दी !! तो हमने कहा था कि हमारी तो आजादी का इतिहास शुरू होता है गौ रक्षा से !! इसलिए गाय की रक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी हमारी आजादी !
गौ हत्या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय>>
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